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5 अग॰ 2018

जबलपुर स्थित रानी दुर्गावती के रहस्यमयी मदन महल किले का इतिहास

Madan Mahal Fort History in Hindi

मदन महल किला ना जाने कितने इतिहासों को अपने अंदर समेटे हुए हैं कहा जाता है यहाँ आत्माओं का वास है और यहाँ पर अजीब सी आवाजें आती है, इसके अलावा कुछ और भी बातें यहां है जो इस किले को खास बनाती है वह है यहां पर सोने की ईंटों का गडा होना।

Madan Mahal Fort History in Hindi

आइए जानते हैं मदन महल किले का इतिहास -


जबलपुर में स्थित एक किला जो पहाड़ों पर निर्मित होने के साथ-साथ उन शासकों के अस्तित्व का साक्षी है जिन्होंने यहां 11 वीं शताब्दी में काफी समय के लिए शासन किया था. जबलपुर का मदन महल किला, मदन सिंह द्वारा बनवाया गया था जिसे देख आज भी हम उस दौर में राजा के शान-शौकत के बारे में अंदाजा लगा सकते हैं। 


मदन महल किले का इतिहास

यह किला शहर से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर है और यह एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है जहां से आसमान के बादलों को आसानी से निहारा जा सकता है. इसके किले को राजा ने बनाया तो था अपनी शान और शौकत के लिए लेकिन युद्ध और हमलों के कारण सेना इसका इस्तेमाल एक वॉच टावर के रूप में करने लगी। 


कहते हैं यह किला भूतिया है बताया जाता है किले में बरसों पहले किसी का साया भटकते हुए देखा गया था जिसकी वजह से लोग रात मेंलोग यहाँ आने से डरते थे. रात होते ही यहां तरह तरह की डरावनी आवाज भी आया करती थी हालांकि इसमें कितनी सच्चाई है कि कहा नहीं जा सकता क्योंकि पहाड़ पर होने की वजह से यहां अपराधिक तत्वों की आमद भी होने लगी थी। 



खंडहर में तब्दील हो चुके इस किले के बारे में यह कहानी प्रचलित है कि यहां पर सोने की इटें गडी है जिसे खोजने के लिए लोग खुदाई भी कर चुके हैं पर सफलता आज तक किसी के हाथ ना लगी. यह किला राजा की माँ रानी दुर्गावती से भी जुड़ा हुआ है जो कि एक बहादुर गोंड रानी के रूप में जानी जाती है। 

खंडहर में तब्दील हो चुके इस किले में आज भी आपको ऐसा नजारें देखने को मिल जाएंगे जैसे कि शाही परिवार का मुख्य कक्ष, युद्ध कक्ष, छोटा सा तालाब और अस्तबल. मदन महल की लिखित कहानियों के अनुसार यहां एक गुप्त सुरंग मिली थी जिसे अब बंद कर दिया गया है, बताया जाता है कि यह सुरंग मंडला जाकर खुलती थी इस सुरंग के रास्ते रानी दुर्गावती मंडला से इस किले तक आती थी. वही किले का एक रास्ता यहां से पास के मंदिर जाता है कहा जाता है कि रानी दुर्गावती इस मंदिर में पूजा करती थी। 



यह रहस्यमयी किला टूरिस्ट के आकर्षण का केंद्र वर्षों से बना हुआ है अगर आप कभी जबलपुर जाए तो इस किले में जाकर इस के रहस्यमयी वातावरण को महसूस कर सकते हैं। 

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