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6 मार्च 2021

Women's Day 2021 : जानिए क्यों मनाते हैं महिला दिवस, क्या है थीम?

 Women's Day 2021 | महिला दिवस

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (International Women's Day) एक Global Day है, इस दिन महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक उपलब्धियों का जश्न मनाया जाता है। इस दिन को लैंगिक समानता में तेजी लाने के संकेत के तौर पर भी देखा जाता है। इस दिन दुनिया भर में Significant Activity देखी जाती है क्योंकि बहुत से Group महिलाओं की उपलब्धियों या महिलाओं की समानता के लिए रैली मनाने के लिए एक साथ आ जाते हैं। यह हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है.

Women's Day 2021 का Theme क्या है?

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2021 का Theme है - Women in leadership: Achieving an equal future in a COVID-19 world. यानी नेतृत्व में महिलाएं: COVID-19 दुनिया में एक समान भविष्य प्राप्त करना.

International Women's Day 2020 का Theme क्या था?

International Women's Day 2020 का Theme था - I am Generation Equality: Realizing Women's Rights यानी मैं जनरेशन इक्वैलिटी हूं : महिलाओं के अधिकारों को साकार करना.

हम 8 मार्च को महिला दिवस क्यों मनाते हैं?

इसके लिए अलग-अलग कहानियाँ प्रचलित हैं-
1 - 1914 में, जर्मनी में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को आयोजित किया गया था, शायद ये दिन इसलिए चुना गया क्योंकि उस दिन रविवार था, और अब यह हमेशा 8 मार्च को सभी देशों में मनाया जाता है। 1914 में इस दिन को महिलाओं के मतदान के अधिकार के लिए समर्पित किया गया था लेकिन जर्मन महिलाओं को इसमें जीत 1918 को प्राप्त हुई।


2 - महिला दिवस को अंतरराष्ट्रीय बनाने का विचार क्लारा ज़ेटकिन नामक महिला से आया। उन्होंने 1910 में कोपेनहेगन में कामकाजी महिलाओं के एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में यह सुझाव दिया। वहां 17 देशों की 100 महिलाएं थीं, और वे क्लारा ज़ेटकिन के सुझाव पर सर्वसम्मति से सहमत हुई।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के प्रतीक कौन से रंग हैं?


बैंगनी, हरा और सफेद अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रंग हैं। बैंगनी रंग न्याय और प्रतिष्ठा का प्रतीक है। हारा रंग आशा का प्रतीक है। सफ़ेद रंग एक विवादास्पद अवधारणा के बाद भी शुद्धता का प्रतिनिधित्व करता है।

क्या हमें आज भी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की आवश्यकता है?

हाँ! फिलहाल Complacency का कोई स्थान नहीं है। विश्व आर्थिक मंच के अनुसार, दुख की बात है कि हम में से कोई भी हमारे जीवन काल में लिंग समानता नहीं देखेगा, और न ही हमारे बच्चों के इस देख पाने की संभावना है. फिलहाल लगभग एक सदी तक लिंग समानता देखने को नहीं मिलेगी।


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