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23 सित॰ 2019

सरोजिनी नायडू का जीवन परिचय | Sarojini Naidu in Hindi

About Sarojini Naidu in Hindi

13 वर्ष की अवस्था में सरोजिनी नायडू (Sarojini Naidu) ने 1300 पंक्तियों की एक लंबी कविता और 2000 पंक्तियों का नाटक लिख दिया था. सरोजनी का कंठ अत्यंत मधुर था, जब वो कविता पाठ करने लगती तो उनका संगीतमय मधुर स्वर सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध हो जाते, यही कारण है कि सरोजिनी को भारत कोकिला की उपाधि प्रदान की गई.

सरोजिनी नायडू का जीवन परिचय

सरोजिनी का जन्म 13 फरवरी सन 1879 ईसवी में हैदराबाद में हुआ था. पिता अघोरनाथ चट्टोपाध्याय तथा माता वरदा सुंदरी की काव्य लेखन में विशेष रुचि थी. सरोजिनी ने काव्य लेखन की प्रतिभा अपने माता-पिता से विरासत में पाई थी. काव्य रचना के साथ-साथ सरोजिनी का अध्ययन कार्य भी चलता रहा.



सन 1890 ईसवी में सरोजिनी नायडू ने मद्रास विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की, उसने सब छात्रों में प्रथम स्थान प्राप्त किया था. एक बालिका के लिए ऐसी सफलता प्राप्त करना उन दिनों असाधारण बात थी. अध्ययन के साथ-साथ सरोजिनी नायडू में गंभीरता आती गई, उनकी कविता के विषय भी बदल गए अब वो अपना समय स्वतंत्र अध्ययन करने और उच्च कोटि की कविताएं लिखने में लगाना चाहती थी.

उच्च शिक्षा के लिए उन्हें इंग्लैंड भेजा गया, वहां उनका परिचय प्रसिद्ध साहित्यकार एडमंड गोस से हुआ. सरोजिनी नायडू (Sarojini Naidu) की कविता लेखन की क्षमता और रुचि देखकर उन्होंने भारतीय समाज को ध्यान में रखकर लिखने का सुझाव दिया। यहाँ पर सरोजनी के तीन कविता संग्रह प्रकाशित हुए-
  1. द गोल्डन थ्रेशहोल्ड (1905)
  2. द बर्ड ऑफ़ टाइम (1912)
  3. द ब्रोकन विंग (1912)
"लिए बांसुरी हाथों में हम घूमें गाते-गाते,
मनुष्य सब है बंधु हमारे, जग सारा अपना है."
Sarojini Naidu in Hindi
यह पंक्तियां थ्रेशहोल्ड की है. इस पुस्तक से इंग्लैंड का साहित्य जगत आश्चर्यचकित रह गया. साहित्यकारों और समाचारपत्रों ने एक स्वर से उनकी प्रशंसा की, भारत में भी इस सफलता पर सरोजनी का अभिनंदन किया।

भारत लौटने पर सरोजिनी नायडू का विवाह डॉ गोविंदराजुलू के साथ हुआ. वह हैदराबाद के रहने वाले तथा सेना में डॉक्टर थे. इस अंतरजातीय विवाह के लिए ब्रह्म समाज विचार के माता-पिता ने सहर्ष अनुमति प्रदान की, उनका वैवाहिक जीवन सुखी था.

गोपाल कृष्ण गोखले तथा महात्मा गांधी के साथ आने पर सरोजिनी नायडू (Sarojini Naidu) नायडू राष्ट्रप्रेम तथा मातृभूमि को संबोधित कर कविताएं लिखने लगी.
"श्रम करते हैं हम
की समृद्ध हो तुम्हारी जागृति का पल
हो चुका जागरण
अब देखो, निकला दिन कितना उज्जवल।"
सरोजिनी नायडू की इन पंक्तियों को पढ़कर सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि उनका हृदय देश प्रेम से सर्वथा ओतप्रोत रहा. सन 1912 ईसवी में "द बर्ड ऑफ़ टाइम" नामक कविता संग्रह का प्रकाशन हुआ. इनकी प्रशंसा करते हुए यॉर्कशायर पोस्ट नामक पत्र ने लिखा था "श्रीमती नायडू ने हमारी भाषा को तो समृद्ध किया ही है. पूर्वी देशों की भावना और आत्मा से भी हमारा निकट का संपर्क कराया है.
"समय के पंछी का उड़ने को सीमित विस्तार,
पर लो, पंछी तो यह उड़ चला।"
सरोजिनी नायडू
इन पंक्तियों ने साहित्य प्रेमियों को स्वर्गिक आनंद का अनुभव कराया। सरोजिनी नायडू में तारों तक पहुंचने के लिए ऊपर उठने की चाहत थी. उन्होंने अपने कविता संग्रह "द ब्रोकन विंग" में लिखा है-
"ऊंचा उड़ती हूं मैं कि पहुँचूँ नियत झरने तक,
टूटे यह पंख लिए, मैं चढ़ती हूं ऊपर तारों तक।"
गोपाल कृष्ण गोखले सरोजिनी नायडू के अच्छे मित्र थे. वे उस समय भारत को अंग्रेजी सरकार से मुक्त कराने का कार्य कर रहे थे. इस कार्य से सरोजिनी नायडू बहुत प्रभावित हुई उन्होंने कहा -
"देश को गुलामी की जंजीरों में जकड़ा देखकर कोई भी ईमानदार इंसान बैठकर केवल गीत नहीं गुनगुना सकता। कवित्री होने की सार्थकता इसी में है कि संकट की घड़ी में निराशा और पराजय के क्षणों में आशा का संदेश दे सकूं।"



ऐसा दृढ़ संकल्प करके सरोजिनी ने देशभर में चारों तरफ घूम-घूम कर स्वाधीनता का संदेश फैलाया। उनका अधिकतर समय राजनीतिक कार्यों में व्यतीत होने लगा. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने के बाद उनका कविता लेखन का कार्य धीमा पड़ गया. लेकिन जो स्थान अंग्रेजी काव्य लेखन में उन्होंने अपने लिए बना लिया था वह आज भी विद्यमान है.

सरोजिनी को लिखने के साथ-साथ वाणी का भी वरदान मिला था. लोग उनके धाराप्रवाह भाषण को मंत्रमुग्ध होकर सुना करते थे. वे पर्दा प्रथा पर प्रहार, हिंदू मुस्लिम एकता पर बल और स्वदेशी की भावना का प्रचार आदि मुद्दों को लेकर देश के विभिन्न भागों में जागृति का संदेश लेकर गई. इनके जोशीले भाषणों की देशभर में बड़ी धूम थी.

गांधीजी 1916 ईसवी में कांग्रेस अधिवेशन में सम्मिलित हुए उन्होंने वहां पर भी सरोजिनी नायडू को उत्साह पूर्वक भाग लेते हुए पाया। यहीं पर जवाहरलाल नेहरू से उनकी पहली भेंट हुई थी. नेहरू जी ने लिखा है "मैं उन दिनों सरोजिनी नायडू के कई धाराप्रवाह भाषणों से प्रभावित हुआ था. वे राष्ट्रीयता और देशभक्ति से भरी थी"

सन 1919 ईसवी में जब प्रथम सत्याग्रह संग्राम का प्रतिज्ञा पत्र तैयार किया गया तो उसमें उन्होंने बढ़-चढ़कर भाग लिया। सन 1922 ईसवी में गांधी जी पर मुकदमा चला और उन्हें 6 वर्ष की सजा हो गई. इस समय सरोजिनी नायडू (Sarojini Naidu) ने खद्दर वस्त्र धारण किया और देश के कोने-कोने में सत्याग्रह संग्राम का संदेश पहुंचाने के कार्य में लग गईं. वह कवित्री होने के साथ-साथ स्वतंत्रता संग्राम की उच्च कोटि की नेता भी थी.

1925 ईसवी में इन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष चुन लिया गया. इस समय गांधी जी ने उत्साह भरे शब्दों में उनका स्वागत किया और कहा "पहली बार एक भारतीय महिला को देश की सबसे बड़ी सौगात मिली है" सन 1930 ईसवी में गांधी जी ने नमक कानून तोड़ो आंदोलन में दांडी मार्च किया और नमक कानून तोड़ा।सरोजिनी नायडू महिलाओं के दल के साथ पहले से समुद्र के किनारे उपस्थित थी.

1942 ईसवी में गांधीजी के भारत छोड़ो आंदोलन में उन्होंने भाग लिया। आजादी की लड़ाई में उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा लेकिन वह कभी पीछे नहीं हटी. अंततः भारत के लिए वह सुनहरा दिन भी आया जिसकी लोगों को वर्षों से प्रतीक्षा थी.

भारत स्वतंत्र हुआ और श्रीमती सरोजिनी नायडू को उत्तर प्रदेश के राज्यपाल पद का भार सौंपा गया. उत्तरदायित्व कि इतने उच्च पद पर आसीन होने वाली ये भारत की प्रथम महिला थी. उनके कार्यकाल में उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक जीवन में उत्साह दिखाई दिया।

सरोजिनी को इस बात का अच्छी तरह अनुभव था कि नारी अपने परिवार और देश के लिए कितना महान कार्य कर सकती है इसलिए उन्होंने नारी मुक्ति और नारी शिक्षा आंदोलन शुरू किया। नारी विकास को ध्यान में रखकर वो अखिल भारतीय महिला परिषद की सदस्य बनी.

सरोजनी नायडू का व्यवहार बहुत सामान्य था. वे राजनीतिक एवं सामाजिक जिम्मेदारियों को निभाने के साथ-साथ गीत और चुटकुलों का आनंद लिया करती थी. प्रकृति से उन्हें बड़ा प्रेम था. जब 30 जनवरी सन 1948 को दिल्ली में राष्ट्रपिता गांधी जी की हत्या कर दी गई तो इस वज्रपात से सरोजिनी नायडू सदमे में आ गयी.

पूरे देश भर में उदासी छा गई, सरोजिनी नायडू ने अपनी श्रद्धांजलि में कहा -

"मेरे गुरु, मेरे नेता, मेरे पिता की आत्मा शांत होकर विश्राम न करें बल्कि उनकी राख गतिमान वो उठे, चंदन की राख. उनकी अस्थियां इस प्रकार जीवंत हो जाएं और उत्साह से परिपूर्ण हो जाए कि समस्त भारत उनकी मृत्यु के बाद वास्तविक स्वतंत्रता पाकर पुनर्जीवित हो उठे, मेरे पिता विश्राम मत करो ना हमें विश्राम करने दो. हमें अपना वचन पूरा करने की क्षमता दो, हमें अपनी प्रतिज्ञा पूरी करने की शक्ति दो, हम तुम्हारे उत्तराधिकारी हैं, संतान है, सेवक हैं, तुम्हारे स्वप्न रक्षक हैं. भारत के भाग्य निर्माता हैं, तुम्हारा जीवन काल हम पर प्रभावी रहा है, अब तुम मृत्यु के बाद भी हम पर प्रभाव डालते रहो."

गांधी जी की मृत्यु का आघात उनके लिए बड़ा घातक सिद्ध हुआ, धीरे-धीरे उनका स्वास्थ्य बिगड़ने लगा. 1 मार्च 1949 को जब वे बीमार थी उन्होंने नर्स से गीत सुनाने का आग्रह किया। नर्स का मधुर गीत सुनते सुनते वो चिर निंद्रा में सो गई. 2 मार्च 1949 को प्रातः 3:30 बजे भारत कोकिला (Sarojini Naidu) सदा के लिए मौन हो गई लेकिन उनकी मृत्यु तो केवल शरीर से हुई है. अपने यशरूपी शरीर से वे आज भी हमारे बीच में हैं.

सरोजिनी नायडू (Sarojini Naidu) ने जो जीवन भर विभिन्न रूपों में देश की सेवा की है इसके लिए हम भारतवासी सदैव उनके ऋणी रहेंगे।

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11 सित॰ 2019

कबीर के बेहतरीन दोहे हिन्दी अर्थ के साथ | Kabir ke dohe

कबीर के दोहे | Kabir ke dohe

संत कबीर 15वीं सदी के महान भारतीय कवि थे. वे अंध विश्वाश और सामाजिक बुराइयों के आलोचक थे. आज की इस पोस्ट में हम आपके साथ शेयर करने जा रहे हैं संत कबीर के कुछ बेहद प्रसिद्ध दोहे (Kabir ke dohe) तो चलिए शुरू करते हैं.

कबीर के दोहे

कबीर दोहा 1 -
चलती चक्की देख कर, दिया कबीरा रोए दो पाटन के बीच में,साबित बचा न कोए.

अर्थ - पीसते हुए पत्थरों को देखते हुए, कबीर रोने लगते हैं, कोई भी जीवित नहीं रहता है। कबीर की अनुसार दो पत्थर वो हैं जिनके बीच हम रहते हैं जैसे - स्वर्ग और पृथ्वी, अच्छा और बुरा, पुरुष और महिला, उच्च और निम्न आदि. कोई भी इसकी शक्तिशाली पकड़ से नहीं बच पता है. जो भी इस द्वंद्व में प्रवेश करता है वह कुचला जाता है.
Kabir ke dohe

कबीर दोहा 2 -
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा ना मिल्या कोए जो मुन्न खोजा अपना, तो मुझसे बुरा ना कोए.



अर्थ - कबीर कहते हैं कि उन्होंने बुरे आदमी के लिए दुनिया की खोज की, लेकिन वह उस बुरे व्यक्ति को नहीं खोज सके, फिर उन्होने अपनी सोच प्रक्रिया और अपने मन को देखा. उसके बाद उन्हें वास्तविक दुष्ट व्यक्ति मिला जो उनके दिमाग में रहता था, जब हम आरोप लगाते हैं, तो दूसरे की निंदा करते हैं, यह हमारा दिमाग है जो उंगली से इशारा करता है, दूसरा व्यक्ति शायद निर्दोष है या परिस्थितियों का शिकार है. क्या हम निंदा करने वाले व्यक्तियों के शरीर में निवास करते हैं, उनका जीवन जीते हैं, उनकी परिस्थितियों को जानते हैं?

कबीर दोहा 3 -
काल करे सो आज कर, आज करे सो अब पल में प्रलय होएगी, बहुरि करेगा कब?

अर्थ - कल का काम आज करो और आज का काम अब, अगर यह पल चला गया तो फिर काम कैसे होगा? मतलब वह काम करो जो अब करने की जरूरत है। इसके लिए इंतज़ार मत करो.

कबीर दोहा 4 -
ऐसी वाणी बोलिये, मन का आपा खोए अपना तन शीतल करे, औरन को सुख होए.

अर्थ - ऐसे शब्दों का उपयोग करें जिससे आपका अहंकार समाप्त हो जाए. डींग मत मारो, उदास मत बनो, अपने आप को बड़ा, महत्वपूर्ण, समृद्ध या ऐसा कुछ भी मत बनाओ जो अहंकार को संलग्न करता है. यदि अहंकार लोगों के शब्दों में नहीं दिखता है, तो सुनने वाले को भी शांति मिलती है.

कबीर दोहा 5 -
धीरे धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होए माली सींचे सौ घड़ा, ऋतू आये फल होए.

अर्थ - इस दोने में कबीर अपने मन को धीमा करने के लिए कहते हैं, जीवन में सब कुछ धीरे-धीरे होता है, अपने समय में, फल केवल ऋतु आने पर मिलता है, उसी प्रकार जीवन का फल अपने समय में मिलेगा.



कबीर दोहा 6 -
साईं इतना दीजिये, जा में कुटुम्ब समाये मैं भी भूखा न रहूँ, साधु न भूखा जाये

अर्थ - इस दोहे में कबीर भगवान से धन मांगते हुए कहते हैं, भगवान, मुझे इतना धन दे दो, मैं भूखा न रहूं और ना ही कोई साधु भूखा जाए. इसके अलावा वह एक हवेली, एक मर्सिडीज या लाखों रुपये की मांग नहीं करते.

कबीर दोहा 7 -
बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर पंथी को छाया नहीं, फल लागे अतिदूर

अर्थ - अगर तुम बड़े हो तो क्या? जैसे खजूर का पेड़ बड़ा होनी के बाद भी यात्रियों के लिए कोई छाया नहीं दे पाता, उसके फल तक पहुँचना भी कठिन है, इसलिए महत्वपूर्ण, और धनी होने के लिए बड़ा होना जरूरी नहीं है.

कबीर दोहा 8 -
माँगन मरण सामान है, मत कोई मांगे भीख माँगन से मरना भला, यह सतगुरु की सीख

अर्थ - भीख माँगना मरने के समान है, यह सतगुरु का संदेश है जिसका अर्थ है भीख मत मांगो, किसी को समय दो, कुछ सेवा दो, दोस्ती दो, प्यार दो लेकिन भीख मत दो।

कबीर दोहा 9 -
कबीरा खड़ा बाजार में, मांगे सबकी खैर ना काहू से दोस्ती, न काहू से बैर

अर्थ - कबीरा बाज़ार में खड़ा है, वो हर किसी की समृद्धि की दुआ करता है वो न तो किसी के लिए विशेष दोस्त है और न ही दुश्मन.

कबीर दोहा 10 -
पोथी पढ़ पढ़ कर जग मुआ, पंडित भायो न कोई ढाई आखर प्रेम के, जो पढ़े सो पंडित होए

अर्थ - किताबों और शास्त्रों को पढ़ कर ना जाने कितनों की मृत्यु हो गई, लेकिन कोई भी पंडित नहीं बन पाया. प्यार के दो और आधे शब्द, जो कोई भी पढ़ता है, वो पंडित बन जाता है जिसका अर्थ है कि पुस्तक सीखने के बारे में भूल जाओ, किताबें पढ़ने से आप बुद्धिमान नहीं बनेंगे, प्यार के कुछ शब्द सीख लीजिये और आप पंडित बन जाएंगे.

कबीर दोहा 11 -
दुःख में सिमरण सब करे, सुख में करे न कोए जो सुख में सिमरन करे, तो दुख काहे को होय

अर्थ - जब भी कोई दुख में होता है भगवान को याद करता है, खुशी में कोई याद नहीं करता. अगर कोई भगवान की प्रार्थना करता है और उसे खुशी में याद करता है, तो दुःख आएगा ही क्यों? अर्थ दुनिया में आपके द्वारा अनुभव की गई पीड़ा आपको जगाने के लिए बनाई गई है. जब आप भगवान को महसूस करते हैं तो आप जाग जाते हैं. अगर आपने अपने खुश समय के दौरान ऐसा किया, तो आप दुख का अनुभव नहीं करेंगे.


संत कबीर के बारे में अन्य जानकारी - कबीर - विकिपीडिया


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1 सित॰ 2019

[BEST] Suvichar in hindi with Image wallpaper

Suvichar in Hindi

इस पोस्ट में हम आपके साथ शेयर करने जा रहे हैं कुछ चुनिन्दा हिन्दी सुविचार, गुड मॉर्निंग हिन्दी सुविचार और Hindi Suvichar Image Wallpaper.

"वास्तविक बने रहें; बाकी सबकुछ पहले ही लिया जा चुका है" - ऑस्कर वाइल्ड

"ऐसे नाचो जैसे कोई नहीं देख रहा हो
ऐसे प्यार करो जैसे कभी धोखा ना मिलने वाला हो
ऐसे गाओ जैसे कोई नहीं सुन रहा हो,
और ऐसे जियो जैसे कि यह धरती स्वर्ग है ”
- विलियम डब्ल्यू पर्की

"वह परिवर्तन बने जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं।"
- महात्मा गांधी



"कोई भी आपकी सहमति के बिना आपको हीन महसूस नहीं करा सकता है।"
- एलेनोर रूजवेल्ट

"ऐसे जिए जैसे आप कल मरने वाले हो और ऐसे सीखिये जैसे कि आप हमेशा जिंदा रहने वाले हो"
- महात्मा गांधी

सुविचार हिन्दी
“अंधेरे अंधेरे को नहीं हटा सकता, केवल प्रकाश ही ऐसा कर सकता है. नफरत नफरत से नहीं हटायी जा सकती, केवल प्यार ही ऐसा कर सकता है। ”
- मार्टिन लूथर किंग जूनियर

"संगीत के बिना, जीवन एक गलती जैसा होगा"
- फ्रेडरिक निएत्ज़्स्चे

"अभिरुचि सुंदरता है, पागलपन प्रतिभा है और एक उबाऊ होने से हास्यास्पद होना बहुत बेहतर है।"
- मैरिलिन मुनरो

"हम सभी गटर में हैं, लेकिन हममें से कुछ सितारे देख रहे हैं।"
- ऑस्कर वाइल्ड

"बीता हुआ कल इतिहास है, गुजरा हुआ कल एक रहस्य है, आज भगवान का एक उपहार है, यही कारण है कि हम इसे प्रेसेंट कहते हैं।"
- बिल कीन

हिन्दी सुविचार
“मैं असफल नहीं हुआ। मुझे सिर्फ 10,000 ऐसे तरीके मिले हैं जो काम नहीं करते। ”
- थॉमस ए एडीसन

"आपके भीतर एक अनकही कहानी को जन्म देने से बड़ी कोई पीड़ा नहीं है।"
- माया एंजेलो

"जो भी आप कल्पना कर सकते हैं वो सब सच है।"
- पब्लो पिकासो

“जीवन अपने आप को खोजना नहीं, अपने आप को बनाना है।"
- जॉर्ज बर्नार्ड शॉ

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“जब खुशी का एक दरवाजा बंद होता है, तो दूसरा खुलता है; लेकिन अक्सर हम बंद दरवाजे पर इतने लंबे समय तक देखते हैं कि हमें वह दरवाजा नहीं दिखता जो हमारे लिए खोला गया है। ”
- हेलेन केलर

Good morning suvichar in hindi

Good morning suvichar in hindi


  • ऐसा लक्ष्य निर्धारित करें जो आपको सुबह बिस्तर से बाहर निकालने पर मजबूर कर दे.
  • मैंने आज सुबह दो उपहार खोले। वे मेरी आंखें थीं.
  • आपके पास यह दिन फिर कभी नहीं होगा इसलिए खुलकर जिए.
  • उठो, और हर दिन उज्ज्वल अवसर की तलाश करो.
  • एक सुहानी सुबह के लिए खुशहाल विचार ही एकमात्र इलाज है .. और जब मैं आपके बारे में सोचता हूं तो मुझे सबसे ज्यादा खुशी होती है!
गुड मॉर्निंग सुविचार

  • "एक मुस्कान और एक सकारात्मक सोच के साथ अपने दिन की शुरुआत करें।" - गुड मॉर्निंग
  • “यदि कल एक अच्छा दिन था तो रुकना नहीं क्योंकि शायद आपकी जीत अभी शुरू ही हुई हो ”
  • “लोगों को अपने सपने बताओ नहीं, उन्हें करके दिखाओ।"
  • "सुबह में एक छोटा सा सकारात्मक विचार आपके पूरे दिन को बदल सकता है।"
  • "हर सुबह उठो और अपने आप से कहो:" मैं यह कर सकता हूँ! "- गुड मॉर्निंग
  • “यह सुबह कभी भी आपके जीवन में दुबारा वापस नहीं आएगी, उठो और इसका अधिकतम लाभ उठाओ। " - गुड मॉर्निंग
  • "आईने में मुस्कुराओ, ऐसा हर सुबह करो और तुम अपने जीवन में एक बड़ा अंतर देखना शुरू करोगे।"
  • "भगवान हमेशा हमें उस स्थान पर ले जाना चाहते हैं जहां हमें होना चाहिए, न कि जहां हम होना चाहते हैं।" - गुड मॉर्निंग
  • "यदि आप आज शुरू नहीं करते हैं तो आप कल खत्म नहीं कर सकते" - गुड मॉर्निंग

Good morning suvichar in hindi
  • अंदर स्थिरता होने पर बाहर की दुनिया बाहर बेहद खूबसूरत हो जाती है। ”- गुड मॉर्निंग
  • "सुबह लगभग एक साफ स्लेट्स की तरह है। मैं लगभग साफ इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि कल का अवशेष कभी-कभी उन पर अटक जाता है। ”- गुड मॉर्निंग
  • "अपने आप में और अपनी क्षमताओं में विश्वास करो" - गुड मॉर्निंग
  • "सुबह की सैर पूरे दिन के लिए आशीर्वाद जैसी है।" - गुड मॉर्निंग
  • "जो आवश्यक है उसे करना शुरू करें, फिर जो संभव है वह करें और अचानक आप असंभव को पूरा कर रहे होंगे"
  • "दुनिया को आपकी मुस्कान मत बदलने दो, अपनी मुस्कान से इस दुनिया को बदल दो।" - टोनी रॉबिंस
  • "हम जो कुछ भी चाहते हैं वह डर के दूसरी तरफ है।"
  • ईमानदारी में एक शक्ति है जो बहुत कम लोगो के पास है - शुभ प्रभात!

गुड मॉर्निंग सुविचार
सूर्य एक दिन के लिए चमकता है, मोमबत्ती एक घंटे के लिए, माचिस एक मिनट के लिए लेकिन एक अच्छा दिन हमेशा के लिए चमक सकता है, इसलिए अपने दिन की शुरुआत एक मुस्कान के साथ करें. - शुभ प्रभात!



हर सुबह मैं दो खूबसूरत चीजों के लिए आभारी महसूस करता हूं - मेरी लाइफ और मेरी वाइफ़ - गुड मॉर्निंग
आपको पता नहीं है कि कितना अच्छा लगता है हर सुबह जागना और यह महशूस करना कि तुम मेरी हो और मैं तुम्हारा - गुड मॉर्निंग

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30 जुल॰ 2019

Rozdhan App से ऐसे कमाएं फ्री Paytm Cash

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17 जुल॰ 2019

Surdas ke Dohe in hindi सूरदास के दोहे और उनका हिन्दी अर्थ

Surdas ke Dohe सूरदास के दोहे

सूरदास 16वीं सदी के नेत्रहीन हिंदू भक्ति कवि और गायक थे, जो कृष्ण की प्रशंसा में लिखे गए अपने दोहे के लिए जाने जाते हैं. वे आमतौर पर ब्रजभाषा में लिखते थे, जो हिंदी की दो साहित्यिक बोलियों में से एक है.

सूरदास को वल्लभ आचार्य की शिक्षाओं से प्रेरणा मिली जिन्हें वह 1510 में मिले थे. उनके बारे में कई कहानियां हैं, लेकिन ज्यादातर यह कहा जाता है कि वह अपने जन्म से अंधे थे.
Surdas ke Dohe
सूर सागर नामक पुस्तक उनके द्वारा लिखी प्रमुख किताब है. आज के इस लेख में हम आपको कुछ मशहूर सूरदास के दोहे (Surdas ke Dohe) और उनका हिन्दी अर्थ बताने जा रहे हैं.


Surdas Ke Dohe with Hindi meaning सूरदास के दोहे

सूरदास के दोहे 1 - Surdas Ke Dohe 1

दोहा - अंखियां हरि-दरसन की प्यासी देख्यौ चाहति कमलनैन कौ¸ निसि-दिन रहति उदासी।। आए ऊधै फिरि गए आंगन¸ डारि गए गर फांसी। केसरि तिलक मोतिन की माला¸ वृन्दावन के बासी।। काहू के मन को कोउ न जानत¸ लोगन के मन हांसी। सूरदास प्रभु तुम्हरे दरस कौ¸ करवत लैहौं कासी.

अर्थ - इस दोहे में श्रीकृष्ण के विरह में व्याकुल गोपियों की मनोदशा का अद्भुत चित्रण किया गया है. राग घनाक्षरी पर आधारित सूरदास जी का यह पद भगवान से मिलने के लिये भक्त की व्याकुलता दर्शाता है। गोपियां श्रीकृष्ण के विरह में व्याकुल होकर कहती हैं कि हे हरि! हमारी आंखें तुम्हारे दर्शनों के लिए प्यासी हैं। हे कमल नयन! ये नेत्र आप ही के दर्शनों की इच्छुक हैं, आपके बिना यह दिन-रात उदास रहती हैं। इस पर भी उद्धव यहां आकर हमें ब्रह्म ज्ञान का उपदेश ग्रहण करने की बात कहकर दुविधा में डाल गए हैं। हे वृंदावन वासी, केसर का तिलक लगाने वाले व मोतियों की माला धारण करने वाले श्रीकृष्ण! किसी के मन की कौन जाने! लोग तो हंसी उडाना ही जानते हैं। सूरदास आगे कहते हैं कि गोपियां श्रीकृष्ण के दर्शन करके ही स्वयं को धन्य करना चाहती हैं। ठीक वैसे ही जैसे काशी, प्रयाग आदि स्थानों में प्राण देने पर लोग समझते हैं कि उनकी मुक्ति हो गई। गोपियां भी कृष्ण दर्शनों में ही स्वयं को मुक्त समझती हैं.

सूरदास के दोहे 2 - Surdas Ke Dohe 2

दोहा - मधुकर! स्याम हमारे चोर। मन हरि लियो सांवरी सूरत¸ चितै नयन की कोर।। पकरयो तेहि हिरदय उर-अंतर प्रेम-प्रीत के जोर। गए छुड़ाय छोरि सब बंधन दे गए हंसनि अंकोर।। सोबत तें हम उचकी परी हैं दूत मिल्यो मोहिं भोर। सूर¸ स्याम मुसकाहि मेरो सर्वस सै गए नंद किसोर।।

अर्थ - गोपिकाऐं भ्रमर को संबोधन करके,उद्धवजी को अपनी वेदना सुना रही है "हे मधुकर !! श्याम हमारा चोर है !! उन्होने,अपनी मधुर वाणी से, चंचल कटाक्ष से हमारा मन चुरा लिया है, हमने तो उन्हें हमारे दिल में, प्रेम और प्रीती से बांध रखा था लेकिन वो सब बंधन छुडाकर चल पडे और दे गये अपना मद-मधुर हास्य !! रातभर हम उनकी यादों से चौंक उठते है और सुबह में उनके दूत- भ्रमर का दर्शन होता है!! श्रीकृष्ण जी,अपना मंद-मधुर-हास्य से हमारा सब कुछ लूंट कर ले गए.

सूरदास के दोहे 2 - Surdas Ke Dohe 2

दोहा - चरन कमल बंदौ हरि राई । जाकी कृपा पंगु गिरि लंघै आंधर कों सब कछु दरसाई॥ बहिरो सुनै मूक पुनि बोलै रंक चले सिर छत्र धराई । सूरदास स्वामी करुनामय बार-बार बंदौं तेहि पाई.
Surdas ke dohe
अर्थ - श्रीकृष्ण की कृपा होने पर लंगड़ा व्यक्ति भी पर्वत को पार कर सकता है, अन्धे को भी सबकुछ दिखाई देने लगता है, बहरा व्यक्ति भी सुनने लगता है, गूंगा बोलने लगता है और गरीब व्यक्ति भी अमीर हो जाता है. ऐसे दयालु श्रीकृष्ण की चरण वन्दना कौन नहीं करना चाहेगा?

सूरदास के दोहे 3 - Surdas Ke Dohe 3

दोहा - मुखहिं बजावत बेनु धनि यह बृंदावन की रेनु। नंदकिसोर चरावत गैयां मुखहिं बजावत बेनु॥ मनमोहन को ध्यान धरै जिय अति सुख पावत चैन। चलत कहां मन बस पुरातन जहां कछु लेन न देनु॥ इहां रहहु जहं जूठन पावहु ब्रज बासिनि के ऐनु। सूरदास ह्यां की सरवरि नहिं कल्पबृच्छ सुरधेनु॥

अर्थ - यह ब्रज की मिट्टी भी धन्य है जहाँपर श्रीकृष्ण गायों को चराया करते हैं और अधरों पर रखकर बांसुरी बजाते हैं. इस भूमि पर कृष्ण का ध्यान करने से मन को बहुत ज्यादा शांति मिलती है. सूरदास मन को सम्बोधित करते हुए कहते हैं कि अरे मन! तुम क्यों इधर-उधर भटकते हो. ब्रज में हीं रहो, यहाँ न किसी से कुछ लेना है, और न किसी को कुछ देना है. ब्रज में रहते हुए ब्रजवासियों के जूठे बरतनों से जो कुछ मिले उसी को ग्रहण करने से ब्रह्मत्व की प्राप्ति है. सूरदास कहते हैं कि ब्रजभूमि की समानता कामधेनु गाय भी नहीं कर सकती है.

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Surdas Ke Dohe with Hindi meaning सूरदास के दोहे

सूरदास के दोहे 4 - Surdas Ke Dohe 4

दोहा - मुख दधि लेप किए सोभित कर नवनीत लिए। घुटुरुनि चलत रेनु तन मंडित मुख दधि लेप किए॥ चारु कपोल लोल लोचन गोरोचन तिलक दिए। लट लटकनि मनु मत्त मधुप गन मादक मधुहिं पिए॥ कठुला कंठ वज्र केहरि नख राजत रुचिर हिए। धन्य सूर एकौ पल इहिं सुख का सत कल्प जिए॥

अर्थ - भगवान श्रीकृष्ण अभी बहुत छोटे हैं और यशोदा के आंगन में घुटनों के बल चल रहे हैं. उनके छोटे हाथों में ताजा मक्खन है और वे मक्खन को लेकर घुटनों के बल चल रहे हैं. उनके शरीर पर मिट्टी लगी हुई है. मुँह पर दही लिपटा हुआ है, उनके गाल सुंदर हैं और आँखें बेहद आकर्षक हैं. ललाट पर गोरोचन का तिलक लगा हुआ है. बालकृष्ण के बाल घुंघराले हैं. जब वे घुटनों के बल माखन लिए हुए चलते हैं तब घुंघराले बालों की लटें उनके कपोल पर झूमने लगती है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है मानो भौंरा मधुर रस पीकर मतवाला हो गया है. उनका सौंदर्य उनके गले में पड़े कंठहार और सिंह नख से और बढ़ जाता है. सूरदास कहते हैं कि श्रीकृष्ण के इस बालरूप का दर्शन यदि एक पल के लिए भी हो जाता तो जीवन सार्थक हो जाता है. अन्यथा सौ कल्पों तक भी यदि जीवन निरर्थक हीं है.


सूरदास के दोहे 5 - Surdas Ke Dohe 5

दोहा - मोहिं प्रभु तुमसों होड़ परी। ना जानौं करिहौ जु कहा तुम नागर नवल हरी॥ पतित समूहनि उद्धरिबै कों तुम अब जक पकरी। मैं तो राजिवनैननि दुरि गयो पाप पहार दरी॥ एक अधार साधु संगति कौ रचि पचि के संचरी। भ न सोचि सोचि जिय राखी अपनी धरनि धरी॥ मेरी मुकति बिचारत हौ प्रभु पूंछत पहर घरी। स्रम तैं तुम्हें पसीना ऐहैं कत यह जकनि करी॥ सूरदास बिनती कहा बिनवै दोषहिं देह भरी। अपनो बिरद संभारहुगै तब यामें सब निनुरी॥

अर्थ - हे प्रभु, मैंने तुमसे एक होड़ लगा ली है. तुम्हारा नाम पापियों का उद्धार करने वाला है, लेकिन मुझे इस पर विश्वास नहीं है. आज मैं यह देखने आया हूँ कि तुम कहाँ तक पापियों का उद्धार कर सकते हो? तुमने उद्धार करने का हठ पकड़ रखा है तो मैंने पाप करने का सत्याग्रह कर लिया है. इस बाजी में देखना है कौन जीतता है. मैं तुम्हारे कमलदल जैसे नेत्रों से बचकर, पाप-पहाड़ की गुफा में छिपकर बैठ गया हूं.

सूरदास के दोहे 6 - Surdas Ke Dohe 6

दोहा - अबिगत गति कछु कहति न आवै। ज्यों गूंगो मीठे फल की रस अन्तर्गत ही भावै॥ परम स्वादु सबहीं जु निरन्तर अमित तोष उपजावै। मन बानी कों अगम अगोचर सो जाने जो पावै॥ रूप रैख गुन जाति जुगति बिनु निरालंब मन चकृत धावै। सब बिधि अगम बिचारहिं तातों सूर सगुन लीला पद गावै॥

अर्थ - यहाँ अव्यक्त उपासना को मनुष्य के लिए क्लिष्ट बताया है. निराकार ब्रह्म का चिंतन अनिर्वचनीय है. वह मन और वाणी का विषय नहीं है. ठीक उसी प्रकार जैसे किसी गूंगे को मिठाई खिला दी जाए, तो वह मिठाई का स्वाद नहीं बता सकता है. उस मिठाई के रस का आनंद केवल उसका अंतर्मन हीं जानता है. निराकार ब्रह्म का न रूप है, न गुण. इसलिए मन वहाँ स्थिर नहीं हो सकता है, सभी तरह से वह अगम्य है. इसलिए सूरदास सगुण ब्रह्म अर्थात श्रीकृष्ण की लीला का ही गायन करना उचित समझते हैं.

सूरदास के दोहे 7 - Surdas Ke Dohe 7

दोहा - खेलौ जाइ स्याम संग राधा। यह सुनि कुंवरि हरष मन कीन्हों मिटि गई अंतरबाधा॥ जननी निरखि चकित रहि ठाढ़ी दंपति रूप अगाधा॥ देखति भाव दुहुंनि को सोई जो चित करि अवराधा॥ संग खेलत दोउ झगरन लागे सोभा बढ़ी अगाधा॥ मनहुं तडि़त घन इंदु तरनि ह्वै बाल करत रस साधा॥ निरखत बिधि भ्रमि भूलि पर्यौ तब मन मन करत समाधा॥ सूरदास प्रभु और रच्यो बिधि सोच भयो तन दाधा॥

अर्थ - रास रासेश्वरी राधा और रसिक शिरोमणि श्रीकृष्ण एक ही अंश से अवतरित हुये थे। अपनी रास लीलाओं से ब्रज की भूमि को उन्होंने गौरवान्वित किया। वृषभानु व कीर्ति (राधा के माँ-बाप) ने यह निश्चय किया कि राधा श्याम के संग खेलने जा सकती है। इस बात का राधा को पता लगा तब वह अति प्रसन्न हुई और उसके मन में जो बाधा थी वह समाप्त हो गई थी। (माता-पिता की स्वीकृति मिलने पर अब कोई रोक-टोक रही ही नहीं, इसी का लाभ उठाते हुए राधा श्यामसुंदर के संग खेलने लगी।) जब राधा-कृष्ण खेल रहे थे तब राधा की माता दूर खड़ी उन दोनों की जोड़ी को, जो अति सुंदर थी, देख रही थीं। दोनों की चेष्टाओं को देखकर कीर्तिदेवी मन ही मन बहुत प्रसन्न हो रही थीं। तभी राधा और कृष्ण खेलते-खेलते झगड़ पड़े। उनका झगड़ना भी सौंदर्य की पराकाष्ठा ही थी। ऐसा लगता था मानो दामिनी व मेघ और चंद्र व सूर्य बालरूप में आनंद रस की अभिवृद्धि कर रहे हों। यह देखकर ब्रह्म भी भ्रमित हो गए और मन ही मन विचार करने लगे। सूरदास कहते हैं कि ब्रह्म को यह भ्रम हो गया कि कहीं जगत्पति ने अन्य सृष्टि तो नहीं रच डाली। ऐसा सोचकर उनमें ईष्र्याभाव उत्पन्न हो गया।

सूरदास के दोहे 8 - Surdas Ke Dohe 8

दोहा - आजु हरि धेनु चराए आवत। मोर मुकुट बनमाल बिराज पीतांबर फहरावत॥ जिहिं जिहिं भांति ग्वाल सब बोलत सुनि स्त्रवनन मन राखत। आपुन टेर लेत ताही सुर हरषत पुनि पुनि भाषत॥ देखत नंद जसोदा रोहिनि अरु देखत ब्रज लोग। सूर स्याम गाइन संग आए मैया लीन्हे रोग॥

अर्थ - इस दोहे में सूरदास जी ने उस समय का अप्रतिम वर्णन किया है जब भगवान् बालकृष्ण पहले दिन गाय चराने वन में जाते है, यह पद राग गौरी में बद्ध है। आज प्रथम दिवस श्रीहरि गौओं को चरा कर आए हैं। उनके शीश पर मयूरपुच्छ का मुकुट शोभित है, तन पर पीतांबरी धारण किए हैं। गायों को चराते समय जिस प्रकार से अन्य ग्वाल-बाल शब्दोच्चारण करते हैं उनको श्रवण कर श्रीहरि ने हृदयंगम कर लिया है। वन में स्वयं भी वैसे ही शब्दों का उच्चारण कर प्रतिध्वनि सुनकर हर्षित होते हैं। नंद, यशोदा, रोहिणी व ब्रज के अन्य लोग यह सब दूर ही से देख रहे हैं। सूरदास कहते हैं कि जब श्यामसुंदर गौओं को चराकर आए तो यशोदा ने उनकी बलैयां लीं।

सूरदास के दोहे 9 - Surdas Ke Dohe 9

दोहा - चली ब्रज घर घरनि यह बात। नंद सुत संग सखा लीन्हें चोरि माखन खात॥ कोउ कहति मेरे भवन भीतर अबहिं पैठे धाइ। कोउ कहति मोहिं देखि द्वारें उतहिं गए पराइ॥ कोउ कहति किहि भांति हरि कों देखौं अपने धाम। हेरि माखन देउं आछो खाइ जितनो स्याम॥ कोउ कहति मैं देखि पाऊं भरि धरौं अंकवारि। कोउ कहति मैं बांधि राखों को सकैं निरवारि॥ सूर प्रभु के मिलन कारन करति बुद्धि विचार। जोरि कर बिधि को मनावतिं पुरुष नंदकुमार॥

अर्थ - भगवान् श्रीकृष्ण की बाललीला से संबंधित सूरदास जी का यह पद राग कान्हड़ा पर आधारित है। ब्रज के हर घर में इस बात की चर्चा हो गई कि नंदपुत्र श्रीकृष्ण अपने सखाओं के साथ चोरी करके माखन खाते हैं। एक स्थान पर कुछ ग्वालिनें ऐसी ही चर्चा कर रही थीं। उनमें से कुछ ग्वालिन बोली कि अभी कुछ देर पहले तो वह मेरे ही घर में आए थे। कुछ बोली कि मुझे दरवाजे पर खड़ी देखकर वह भाग गए। एक ग्वालिन बोली कि किस प्रकार कन्हैया को अपने घर में देखूं। मैं तो उन्हें इतना अधिक और उत्तम माखन दूं जितना वह खा सकें। लेकिन किसी भांति वह मेरे घर तो आएं। तभी दूसरी ग्वालिन बोली कि यदि कन्हैया मुझे दिखाई पड़ जाएं तो मैं गोद में भर लूं। एक अन्य ग्वालिन बोली कि यदि मुझे वह मिल जाएं तो मैं उन्हें ऐसा बांधकर रखूं कि कोई छुड़ा ही न सके। सूरदास कहते हैं कि इस प्रकार ग्वालिनें प्रभु मिलन की जुगत बिठा रही थीं। कुछ ग्वालिनें यह भी विचार कर रही थीं कि यदि नंदपुत्र उन्हें मिल जाएं तो वह हाथ जोड़कर उन्हें मना लें और पतिरूप में स्वीकार कर लें।



सूरदास के बारे मेँ और अधिक जाने - Surdas Wikipedia

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15 जुल॰ 2019

[BEST] Swami Vivekananda Quotes In Hindi स्वामी विवेकानंद के 30+ अनमोल विचार

Swami Vivekananda Quotes In Hindi

स्वामी विवेकानंद एक हिंदू संत थे और भारत के सबसे प्रसिद्ध आध्यात्मिक नेताओं में से एक थे. वह एक प्रखर विचारक, महान वक्ता और देशभक्त भी थे. उन्होंने अपने गुरु रामकृष्ण के महान विचारों को एक तेज़ी के साथ आगे बढ़ाया. इस पोस्ट में हम जानेंगे स्वामी विवेकानंद के 30+ अनमोल विचार (Swami Vivekananda Quotes In Hindi).

Swami Vivekananda Quotes In Hindi 1 से 15

Quote 1 - एक लक्ष्य चुनो, उसे अपना जीवन बना लो, उसके बारे में सोचो, उसके सपने देखो, उस विचार पर जियो. मस्तिष्क, मांसपेशियों, नसों, आपके शरीर के प्रत्येक भाग को उस विचार से भरा रहने दें और हर दूसरे विचार को छोड़ दो. यही सफलता का रास्ता है. - स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)


Swami Vivekananda Quotes In Hindi
Quote 2 - जितना हम दूसरों का भला करेंगे, उतना ही हमारा हृदय शुद्ध होगा, और परमेश्वर उसमे वास करेंगे. - स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

Quote 3 - हम ईश्वर को खोजने कहां जा सकते हैं यदि हम उसे अपने दिलों में और हर जीवित प्राणी में नहीं देख सकते हैं. - स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

Quote 4 - दुनिया महान व्यायामशाला है जहां हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं. - स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

Quote 5 - जिस क्षण मैंने प्रत्येक मानव शरीर के मंदिर में भगवान को बैठे हुए महसूस किया है, उस क्षण से मैं बंधन से मुक्त हूं. - स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda Quotes In Hindi)

Quote 6 - उठो! जागो और तब तक न रुकें जब तक कि लक्ष्य पूरा न हो जाए. - स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

Quote 7 - जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते तब तक आप भगवान पर विश्वास नहीं कर सकते. - स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

Quote 8 - आपको अंदर से बाहर की तरफ बढ़ना होगा और ये तुम्हें कोई और नहीं सिखा सकता, कोई तुम्हें आध्यात्मिक नहीं बना सकता, आपकी अपनी आत्मा के अलावा कोई दूसरा शिक्षक नहीं है. - स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

Quote 9 - हम वही हैं जो हमारे विचारों ने हमें बनाया है, इसलिए इस बात का ध्यान रखें कि आप क्या सोचते हैं. शब्द इतना महत्वपूर्ण नहीं हैं जितना विचार हैं, वे दूर तक यात्रा करते हैं. - स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

Quote 10 - जो आप सोचते हैं वही आप बन जाते हैं. यदि आप खुद को कमजोर समझते हैं, तो आप कमजोर होंगे, यदि आप अपने आप को मजबूत समझते हैं, तो आप मजबूत हो हो जाएंगे. - स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda Quotes In Hindi)

Quote 11 - एक समय में एक ही काम करो, और इसे करते समय अपनी पूरी आत्मा को इसमे झोंक दो. - स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

Quote 12 - वह आदमी अमरता तक पहुंच सकता है जो किसी भी भौतिक वस्तु की तरफ आकर्षित नहीं होता है. - स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

Quote 13 - सच्ची खुशी का, सच्ची सफलता का महान रहस्य - वह पुरुष या महिला जो बिना किसी निजी स्वार्थ के दूसरों की मदद करते हैं वो सबसे सफल हैं. - स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

Quote 14 - कभी मत सोचो कि आत्मा के लिए कुछ भी असंभव है. ऐसा सोचना सबसे बड़ा विधर्म है. स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)
Swami Vivekananda Quotes In Hindi
Quote 15 - सबसे बड़ा धर्म है अपने स्वभाव के प्रति सच्चा होना, अपने आप पर विश्वास रखें. स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda Quotes In Hindi)


Swami Vivekananda Quotes In Hindi 16 से 30

Quote 16 - अपने आप पर विश्वास करें और दुनिया आपके चरणों में होगी. स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

Quote 17 - मन की शक्तियां सूर्य की किरणों की तरह हैं जब वे केंद्रित होते हैं तो रोशनी करते करती हैं. स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

Quote 17 - नायक बनें, हमेशा कहते रहे, मुझे कोई डर नहीं है. स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)
swami vivekananda quotes images
Quote 18 - यह हमारा अपना मानसिक दृष्टिकोण है जो दुनिया को हमारे लिए बनाता है. हमारी सोच चीजों को सुंदर बनाती है और हमारे विचार ही चीजों को बदसूरत बनाते हैं. पूरी दुनिया हमारे अपने दिमाग में है. चीजों को उचित नजरिए से देखना सीखें. स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

Quote 19 - ब्रह्मांड में सभी शक्तियां पहले से ही हमारी हैं. यह हम ही हैं जिन्होंने अपनी आँखों के सामने हाथ रखा हुआ है और रोते हुए कहते हैं कि चारो ओर अंधेरा है. स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

Quote 20 - इच्छा, अज्ञानता और असमानता, यह बंधन की त्रिमूर्ति हैं. स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda Quotes In Hindi)

Quote 21 - दिन में कम से कम एक बार खुद से बात करें. अन्यथा, आप इस दुनिया में एक उत्कृष्ट व्यक्ति के साथ एक मीटिंग का अवसर खो देंगे. स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)
Quote 22 - भारत के विकास और प्रगति में योगदान देना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है. स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

Quote 23 - ज्ञान केवल एक अनुभव से मिल सकता है, इसको जानने का और कोई उपाय नहीं है. स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

Quote 24 - किसी चीज से डरो मत फिर आप अद्भुत काम कर सकेंगे. यह निडरता ही है जो स्वर्ग को एक पल में यहाँ ला सकती है. स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

Quote 25 - जो आग हमें गर्म करती है, वह हमें भस्म भी कर सकती है, यह आग का दोष नहीं है. स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda Quotes In Hindi)

यह भी पढ़ें - समय बर्बाद करने वाले इस पोस्ट को जरूर पढ़ें | Time quotes in hindi

Quote 26 - कोई भी चीज जो आपको शारीरिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक रूप से कमजोर बनाती है, उसे जहर की तरह त्याग दो. स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

Quote 27 - कुछ मत पूछो, बदले में कुछ मत मांगों, जो तुम्हें देना है दे दो, यह आपके पास वापस आ जाएगा, लेकिन अभी ऐसा मत सोचो. स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

Quote 28 - जब आप कोई काम कर रहे हों, तो इसे पूजा के रूप में करें और अपना पूरा जीवन इसके लिए समर्पित कर दें. स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

Quote 29 - जिस मनुष्य ने आपकी मदद की है उसके प्रति कृतज्ञ रहें, उसे भगवान जैसा समझें. स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

Quote 30 - जब कोई विचार आपके मन पर कब्जा कर लेता है, तो यह वास्तविक भौतिक या मानसिक स्थिति में बदल जाता है. स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda Quotes In Hindi)

Swami Vivekananda Quotes In Hindi 31 से 35

Quote 31 - अपने जीवन में जोखिम लेना सीखें, यदि आप जीतते हैं, तो आप नेतृत्व कर सकते हैं. यदि आप हारते हैं, तो आप मार्गदर्शन कर सकते हैं. स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

Quote 32 - ध्यान मूर्खों को संतों में बदल सकता है लेकिन दुर्भाग्य से मूर्ख कभी ध्यान नहीं करते हैं. स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

Quote 33 - दिल और मस्तिष्क के बीच संघर्ष में, अपने दिल की आवाज सुने. स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

Quote 34 - आप अपने भाग्य के निर्माता हैं. स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

Quote 35 - सारी कमजोरी को दूर फेंक दो. अपने शरीर को बताएं कि यह मजबूत है. अपने मन को बताएं कि यह मजबूत है और अपने आप में अटूट विश्वास रखें. स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda Quotes In Hindi)



Swami Vivekananda के बारे में और जानने के पढ़ें - Swami Vivekananda Wikipedia in hindi

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13 जुल॰ 2019

[BEST] Farewell Speech in Hindi - विदाई समारोह के लिए फेयरवेल स्पीच

Farewell Speech in Hindi

वैसे तो हम आए दिन ऑफिस, स्कूल, कॉलेज की लाइफ में गुड बाय कहा करते हैं लेकिन फेयरवेल यानी विदाई समारोह के दिन कहा गया गुड बाय साधारण गुड बाय नहीं होता. यह कुछ की आंखें भी नम कर जाता है. विदाई समारोह का अपना एक अलग महत्व है. हम उस शख्स को विदाई देते हैं जो हमारे करीब होता है. वह हमारे ऑफिस, स्कूल, कॉलेज या कहीं भी हो सकता है. इसलिए ऐसे व्यक्ति को विदा करते समय हम चाहते हैं एक ऐसी Farewell Speech तैयार करना जो विदा होने वाले व्यक्ति के दिल को छू जाए और इसीलिए इस पोस्ट में हम लेकर आए हैं Teacher, Junior और Boss के लिए बेस्ट Farewell Speech in Hindi तो चलिए शुरू करते हैं.

Farewell Speech in Hindi

Farewell Speech in Hindi for Teacher

Good Afternoon सम्मानित प्रधानाचार्य, समस्त सम्मानित शिक्षक और मेरे साथी छात्र,  इस विदाई भाषण (Farewell Speech) देते हुए मैं बहुत सम्मानित महसूस कर रहा हूं. आज हम सभी हमारे सम्मानित शिक्षक को विदाई देने के लिए यहाँ उपस्थित हुए हैं. जो आज कई सालों की सक्रिय सेवा के बाद सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं. आज मुझे एहसास हुआ कि समय की समय कितना जल्दी निकाल जाता है.

मुझे यह कहते हुए बहुत खुशी हो रही है कि हमें हमारे प्रिय शिक्षक से बहुत कुछ सीखने को मिला जो भविष्य में बहुत काम आने वाला है, उनके सभी प्रयासों और कड़ी मेहनत के लिए धन्यवाद. बेशक, मुझे पता है कि कितना कठिन होता है, किसी ऐसे व्यक्ति को अलविदा कहना जिसने हमारी शिक्षक कम और पिता की तरह ज्यादा देखभाल की है. हम सभी को स्कूल के उनके इस सरहनीय कार्य के लिए उनका आभार व्यक्त करना चाहिए.

उन्होने अपने 35 कीमती साल हम छात्रों को शिक्षित करने में बिता दिये. मेरे मन में यह कहते हुए कोई संदेह नहीं है कि वे एक कुशल, खुले विचारों वाले, उदार, ज्ञानी, विनम्र, साहसी, जिम्मेदार और उच्च सम्मानित शिक्षक हैं.

मुझे याद है कि जब भी हम छात्र किसी भी चुनौति का सामना कर रहे थे, वह हमेशा हमारे साथ खड़े थे. शिक्षा को आसान और सुखद बनाने के लिए आपका धन्यवाद.

स्कूल में रहने के दौरान, वह एक उत्कृष्ट शिक्षक रहे और शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध रहे. हम छात्र जब भी किसी परेसानी में थे तब आप हमेशा हमारी मदद के लिए तैयार रहे. आपके असाधारण गुणों ने हमें हमेशा प्रेरित किया है. आपसे जुड़ी सभी यादें हमेशा हमारे दिल में रहेंगी.

मुझे याद है कि उनकी कठिन मेहनत के कारण हमने कई प्रतियोगिताओं में भाग लिया, जहाँ हमने स्कूल के लिए पदक और ट्राफियाँ जीतीं. हमें आपकी सभी उपलब्धियों पर गर्व है आपने हमें हमेशा बड़ा सोचने के लिए प्रेरित किया है.

अपने विषयों को उत्साह के साथ पढ़ाने के लिए आपका धन्यवाद. यदि हम छात्रों ने कभी जानबूझकर या अनजाने में आपकी भावनाओं को चोट पहुंचाई है तो उसके लिए हम आपसे माफी मांगना चाहते हैं.

मैं यह प्रार्थना करता हूं कि आपके द्वारा प्राप्त ज्ञान और कौशल का उपयोग हम छात्र एक अच्छे और स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण में कर सके.

यह भी पढ़ें - [IDEAS] Small Investment से कौन सा Business शुरू करें और कैसे - 16 शानदार Business

स्कूल के समस्त छात्रों और स्टाफ की ओर से, अपने कीमती 35 साल हमे देने के लिए मैं आपका धन्यवाद करता हूँ और आपके आगामी जीवन के लिए आपको शुभकामनाएं देता हूं.
धन्यवाद.

Farewell Speech in Hindi for Junior

हमारे प्यारे प्रिंसिपल सर / मैडम, शिक्षकों और मेरे प्यारे दोस्तों को Good Evening. आज मैं आप सभी को अलविदा कहने के लिए यहाँ खड़ा हूँ. मैं इस विदाई भाषण (Farewell Speech) को अपने शिक्षकों को धन्यवाद देने के अवसर के रूप में लेता हूं, जिन्होंने हमारे भविष्य को दिशा प्रदान की, साथ ही हमारे सभी प्यारे जूनियर्स को भी धन्यवाद.

Farewell एक ऐसा समय होता है जो पिछली सारी यादों को वापस ले आता है जो हमने अपने दोस्तों, शिक्षकों और सहकर्मियों के साथ मिलकर बिताई हैं. यह वह क्षण होता है जब हमे वो व्यक्ति भी प्यारा लगता है जिससे हम हमेशा लड़ते हैं. हाँ, यह एक ऐसा क्षण है जिसे केवल महसूस किया जा सकता है, कोई भी शब्द इसका वर्णन नहीं कर सकते. इस भाषण (Farewell Speech) को लिखते समय मेरे लिए सटीक शब्दों को चुनना बहुत कठिन था क्योंकि कोई शब्द उस विशेष फीलिंग के लिए उपयुक्त नहीं लगता है.


मैं उन सभी शिक्षकों, प्रोफेसरों और हमारे प्रधानाचार्य को धन्यवाद देना चाहता हूं जिन्होंने हमें दुनिया के साथ प्रतिस्पर्धा करने लायक बनाया है. हमारे भविष्य को आकार देने में आपका योगदान हमारे साथ रहेगा और उम्मीद है कि एक दिन हमारी सफलता आपको इनाम के रूप में मिलेगी.

हमारे जाने के समय में, मैं अपने जूनियर्स को एक सलाह देना चाहता हूँ क्योंकि उनकी यह यात्रा अभी समाप्त नहीं हुई है.

मेरे सभी प्यारे जूनियर्स को मेरी सलाह है कि आप अपने जीवन में दृढ़ निश्चय करें और कभी पीछे मुड़कर ना देखें. अतीत को हमेशा एक सबक के रूप में लें. गलतियों से डरो मत और अपनी गलतियों के लिए पछताओ नहीं, इसके बजाय, उठो, अपनी गलतियों से सीखो और आगे बढ़ो. आप निश्चित रूप से अपने जीवन में सफल होने जा रहे हैं बस इस कॉलेज में सीखी गयी बातों को हमेशा याद रखें.
धन्यवाद.

Farewell Speech in Hindi for Boss

सबसे पहले आप सभी को Good Afternoon, मेरे प्यारे साथियों, क्या आप जानते हैं कि आज हम यहां क्यों इकट्ठा हुए हैं? मुझे लगता है कि आप सही सोच रहे हैं, हाँ, यह हमारे प्यारे बॉस के रिटायरमेंट पर Farewell Party है.

मुझे यह कहते हुए बेहद दुख हो रहा है कि वह सेवानिवृत्त हो रहे हैं. वो इस कार्यालय से सेवानिवृत्त हो सकते हैं लेकिन वह हमारे दिल से कभी भी सेवानिवृत्त नहीं हो सकते. वह हमेशा हमारे दिल में रहेंगे क्योंकि कोई भी उनकी जगह ले सकता है. हम आज उनकी Farewell के लिए यहां आए हैं, यह बहुत दुखद क्षण है लेकिन हमें उन्हें उनके अंतिम कार्य दिवस पर खुशी में देखने के लिए इसे खुशी का क्षण बनाना होगा.

हमारे बॉस हम सभी के लिए एक प्रिय व्यक्ति हैं जिनहोने इस संगठन को बेहद अच्छे क्षण दिए हैं. वह एक दशक से अधिक हमारे दैनिक कार्यालय के जीवन का हिस्सा रहे हैं लेकिन उन्हें अब उनके जहां से जाना है क्योंकि उन्होंने यहां अपना कार्यकाल पूरा कर लिया है. हम उन्हें बहुत याद करेंगे विशेष रूप से उनके हमेशा मुस्कुराता हुए चेहरे और विनम्र स्वभाव को.

हमें रिटायरमेंट को दुःख के रूप में नहीं लेना चाहिए क्योंकि यह परिवार के लिए अच्छे पल लाता है और नौकरी से रिटायर होने वाले व्यक्ति को आराम और तरोताजा जीवन देता है. रिटायरमेंट के बाद हमें बिना किसी तनाव के खुशी से जीवन जीने का मौका मिलता है और हम अपनी अधूरी इच्छओं को पूरा कर सकते है.


एक बार मैंने बॉस से पूछा कि वह अपने रिटायरमेंट के बाद क्या करेंगे? उन्होंने बहुत विनम्रता से जवाब दिया कि वह कभी भी किसी भी लाभकारी व्यवसाय में शामिल नहीं होंगे और गरीब लोगों के लिए अपनी स्वैच्छिक सेवा शुरू करेंगे. हमारे बॉस बहुत ही दयालु और समय के पाबंद व्यक्ति हैं जिन्होंने रिटायरमेंट के बाद इस तरह की अच्छी योजना बनाई है. वह हमारे कार्यालय में ऐसे व्यक्ति हैं जो कार्यालय के बाद शाम को भी थके हुए नहीं दिखते.



हर कोई कल से कार्यालय में उसकी अनुपस्थिति महसूस करेगा और उन्हें याद करेगा. मैं उन्हें कार्यालय को अपने कीमती वर्ष देने के लिए धन्यवाद कहना चाहता हूँ और रिटायरमेंट के बाद उनके स्वस्थ, समृद्ध और खुशहाल जीवन की कामना करता हूँ
आप सभी को धन्यवाद
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