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26 May 2018

जीवन में सफलता पाने के 7 अचूक मूलमंत्र

जीवन में सफलता पाने के मूलमंत्र

जीवन में सफलता हर कोई चाहता है लेकिन सफल केवल वो लोग होते है जो न सिर्फ जीवन में सफलता पाने के मूलमंत्र को जानते है बल्कि उनका अनुसरण भी करते है इसलिए अगर आप भी जीवन में सफल होना चाहते है तो आज हमारे द्वारा शेयर किये गये जीवन में सफलता पाने के मूलमन्त्रों को हमेसा याद रखियेगा और उनका अनुसरण कीजिएगा। 
सफलता के मूल मंत्र
मूलमंत्र 1- यदि आप किसी कार्य में सफलता चाहते हैं तो समस्या और कठिनाइयों का मजबूती से सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए यदि आप तैयार हैं तभी आगे बढ़े। 



मूलमंत्र 2- जो लोग कोई काम नहीं करते हैं उनके पास खाली समय रहता है जिसका इस्तेमाल वो हमेशा काम करने वाले लोगों का समय खराब करने में करते हैं इसलिए जीवन में हमेशा ऐसे लोगों से दूर ही रहना चाहिए, यदि आपके जीवन में ऐसे लोग आ जाते हैं तो वह आपको कभी भी सफल नहीं होने दे नहीं होने देंगे। 

मूलमंत्र  3- जीवन में वही काम आपका जिंदगी भर साथ देते हैं जिन्हें आप पूरी योजना और सूझबूझ के साथ करते हैं अंदाजे या सहयोग से किया गया काम हमेशा सही साबित नहीं होता है इसलिए कोई भी काम को करते समय पूरी योजना बनाकर ही करें। 

मूलमंत्र  4- बोले गए शब्दों से अधिक महत्वपूर्ण हमारे कार्य होते हैं जीवन में हमेशा ऐसा काम करो जिससे लोग आपको आपकी बातों से नहीं बल्कि आपके कार्यों से आपको जाने। 


मूलमंत्र  5- कोई भी काम को करने से पहले हमेशा भविष्य के बारे में सोच कर चलना चाहिए, आप जो भी कार्य करने जा रहे हो उसके क्या परिणाम हो सकते हैं यह आपको पता होना चाहिए. यदि परिणाम सकारात्मक है तो उस कार्य को शुरू कर देना चाहिए। 
मूलमंत्र  6- धन से अधिक मूल्यवान समय होता है इसलिए धन के साथ-साथ समय के महत्व को भी ध्यान रखना चाहिए क्योंकि धन को अगर आप खो भी देते हैं तो उसे दोबारा प्राप्त किया जा सकता है लेकिन अगर एक बार समय निकल गया तो वह किसी भी कीमत पर दोबारा नहीं मिलता है।

मूलमंत्र  7- जीवन के कई कार्य ऐसे होते हैं जिनमे शॉर्टकट से काम नहीं बनता इसलिए हमेशा शॉर्टकट की तलाश नहीं करनी चाहिए, किसी भी कार्य में जितनी उर्जा की जरूरत होती है उतनी उर्जा तो आपको खर्च करनी ही चाहिए तभी वह काम सही से अपनी मंजिल पर पहुंचकर अच्छे परिणाम दे सकता है।



आशा करते है आपको हामरे द्वारा शेयर किये गये जीवन में सफलता पाने के मूलमंत्र पसंद आए और आप इनका अनुसरण भी करेंगे उम्मीद करते है आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ भी जरूर शेयर करेंगे।

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7 May 2018

दुनिया के 5 सबसे अमीर लोग और उनकी कहानी 2018

दुनिया के 5 सबसे अमीर आदमी और उनकी कहानी 2018

दुनिया का सबसे अमीर आदमी कौन है? यह प्रश्न आते ही आपके दिमाग में कई नाम आने लगते होंगे लेकिन आप ये भी जानते होंगे की यह लिस्ट लगातार बदलती रहती है इसलिए आज इस आर्टिकल में हम आपको बताने जा रहे है 2018 के 5 सबसे अमीर आदमी और उनकी प्रेरणादायक कहानियां। 
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दुनिया के 5 सबसे अमीर लोग

आज दुनिया के 5 सबसे अमीर लोगों की जो सूचि हम आपको बताने वाले है ये फोर्ब्स पत्रिका के अनुसार है जो 2018 के शुरवात में घोषित हुई थी। 



5 - मार्क ज़ुकेरबर्ग

कुल आमदनी4982 बिलियन (इंडियन रूपये)
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हम सभी मार्क ज़ुकेरबर्ग को जानते है जो फेसबुक के निर्माता है। वर्तमान में फेसबुक सबसे ज्यादा प्रसिद्ध सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट है और फेसबुक शुरू हुआ था मार्क ज़ुकेरबर्ग के छोटे से कमरे से जब वो हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ते थे। 

वर्ष 2018 में मार्क ज़ुकेरबर्ग अपनी आय में 2000 बिलियन इंडियन रूपये की वृद्धि के साथ एक स्थान की ऊपरी छलांग लगाते हुए पहुंच गए है दुनिया के सबसे अमीर आदमियों के सूचि में नंबर 5 पर। 

उनकी युवा अवस्था को देखते हुए ऐसी आशा की जा रही है की ऐसी छलांग वो लगातार लगाते रहेंगे और भविष्य में दुनिया के सबसे अमीर आदमियों की सूचि में पहले स्थान में आ जाएंगे।

4 - बरनार्ड अरनाल्ट

कुल आमदनी - 5008 बिलियन (इंडियन रूपये)

बरनार्ड अरनाल्ट LVMH (Louis Vitton Moet Hennessey) के CEO हैं। 

LVMH कंपनी की शुरुवात 2 बिज़नस को 1 साथ मिला कर हुई थी पहली थी Louis Vitton जो की एक मशहूर फैशन ब्रांड थी और दूसरी थी Moet Hennessey जो एक कॉग्नेक निर्माता कंपनी थी। 

बरनार्ड अरनाल्ट ने दुनिया के सबसे अमीर लोगों के सूचि में बहुत लम्बी छलांग लगायी थी 2017 की शुरुवात में बरनार्ड अरनाल्ट दुनिया के अमीर लोगों के सूचि में 14वें स्थान में थे और अब 2018 में बरनार्ड अरनाल्ट 4th स्थान में है।


3 - वारेन बुफेट

कुल आमदनी - 6128 बिलियन (इंडियन रूपये)

वारेन बुफेट अमेरिकन इन्वेस्टर और उद्यमी है साथ ही वो Berkshire Hathaway के CEO भी है। वारेन बुफेट शेयर बाजार के नंबर 1 निवेशक माने जाते है और सभी ट्रेडर्स उन्हें पसंद और फॉलो करते है।

वारेन बुफेट 6128 बिलियन (इंडियन रूपये) की आमदनी के साथ दुनिया के तीसरे सबसे धनि व्यक्ति हैं लेकिन आपको जानकर हैरानी हो सकती है की ऐसी आपार सफलता के बावजूद भी वारेन बुफेट अपने पुराने छोटे से घर में रहते है जहाँ वो सफल होने से पहले रहा करते थे।

वारेन बुफेट की महानता को हम सलाम करते है ऐसे महान पुरुष दुनिया में कम ही होते है।

2 - बिल गेट्स

कुल आमदनी - 6188 बिलियन (इंडियन रूपये)

बिल गेट्स माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के संस्थापक है और पिछले कई वर्षों तक लगातार दुनिया के सबसे धनि व्यक्ति रह चुके है। बिल गेट्स ने माइक्रोसॉफ्ट की शुरुवात 1975 में पॉल एलेन के साथ मिलकर की थी और आज माइक्रोसॉफ्ट दुनिया में नंबर 1 कंप्यूटर सॉफ्टवेयर कंपनी है। 
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बीते वर्ष बिल गेट्स ने अपनी आमदनी में शानदार 670 बिलियन (इंडियन रूपये) की छलांग लगायी जिससे उनकी कुल आमदनी 6188 बिलियन (इंडियन रूपये) पहुंच गयी लेकिन इसके बावजूद लिस्ट में आगे आने वाले व्यक्ति ने बिल गेट्स को पीछे करते हुए दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति में अपना नाम सुमार कर लिया।

1 - जेफ बेज़ोस

कुल आमदनी - 8759 बिलियन (इंडियन रूपये)

जेफ बेज़ोस अमेज़न कंपनी के संस्थापक है जो की इंटरनेट में सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है। अमेज़न की शुरुवात जेफ बेज़ोस के छोटे से कमरे से हुई थी जो शुरुवात में केवल ऑनलाइन किताबे सेल करती थी। धीरे धीरे ऑनलाइन खरीदारी बढ़ने लगी साथ ही अमेज़न में अपने प्रोडक्ट्स भी बढ़ने शुरू कर दिए और देखते ही देखते यह कंपनी शिखर पर पहुंच गयी। 

2018 में जेफ बेज़ोस अपनी कुल आमदनी में 2700 बिलियन (इंडियन रूपये) की बढ़ोतरी करते हुए 8759 बिलियन (इंडियन रूपये) की कुल आय के साथ दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति बन गए। अमेज़न की नई सर्विसेज से अमेज़न कंपनी और मजबूत हो गयी और जेफ बेज़ोस दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए। 

जेफ बेज़ोस एकमात्र ऐसे इंसान है जिन्होंने 100 बिलियन अमेरिकन डॉलर  का आकड़ां पार किया है। 

आपको हमारा यह लेख कैसा लगा कमेंट करके जरूर बताएं साथ ही अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें। 
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30 Apr 2018

Myteam11 से घर बैठे पैसे कैसे कमाएँ - Free Rs 100 Sign Up Bonus

Myteam11 क्या है पूरी जानकारी हिंदी में

आजकल Fantasy क्रिकेट बहुत चर्चित है। मै पहले Dream11 Fantasy क्रिकेट वेबसाइट पर आर्टिकल लिख चूका हु आप काहे तो उसे पढ़ सकते है। Fantasy क्रिकेट आपके लिए एक बहुत अच्छा इनकम स्रोत हो सकता है यदि आपको अच्छी क्रिकेट नॉलेज है। हम इंडियन क्रिकेट के लिए बहुत जुनूनी होते है और क्रिकेट देखने के लिए घंटों टीवी के आगे बैठे रहते है तो क्यों न इस खेल को Fantasy क्रिकेट खेल के और रोमांचक बानाये और साथ में अच्छे पैसे भी कमायें।

Fantasy क्रिकेट खेलते कैसे है?

बहुत से लोग इस प्रश्न का जवाब खोज रहे होंगे की Fantasy क्रिकेट क्या है और Fantasy क्रिकेट खेलते कैसे है तो मै आपको बता दू यह बहुत ही आसान है आपको 22 प्लेयर्स में से अपने पसंदीदा 11 प्लेयर्स को अपनी क्रिकेट नॉलेज और रिसर्च से चुनना है। अपनी पसंदीदा लीग्स ज्वाइन करनी है और मैच पूरा होने पर पैसे कमाने है (अगर आप जीत जाते है) और अगर आपका लक बहुत अच्छा रहा तो 1 मैच आपकी किस्मत भी बदल सकता है जिसमे आप लाखों रूपये जीत जाएँ।


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Myteam11 से 100 रूपये Sign Up Bonus कैसे प्राप्त होता है?

Myteam11 की एप्प डाउनलोड करने के बाद आपको उसमे रेफरल कोड (NCDIC7UM4K) डालना होगा इसके बाद आप 100 रूपये Sign Up Bonus पाने के लिए मान्य हो जाएँगे जिसमे से 50 आपको तुरंत (अपना फ़ोन नंबर और ईमेल आइड सत्यापित करने के बाद) और 50 (पैन कार्ड और बैंक अकाउंट डिटेल डालने के बाद) मिल जाएँगे। अगर आपने अभी तक आपना पैन कार्ड नही बनाया है तो इस पोस्ट को पढ़ कर तुरंत अप्लाई कर सकते है - घर बैठे पैन कार्ड कैसे बनाये

Myteam11 कैसे Join करें?


  1. Myteam11 एप्प डाउनलोड करें - यहाँ क्लिक करें
  2. अपना पूरा नाम, टीम का नाम, ईमेल, पासवर्ड, जन्मतिथि और अन्य जानकारी भरें
  3. इस कोड को डालें - NCDIC7UM4K (Free Rs 100 Sign Up Bonus पाने के लिए यह कोड डालना जरूरी है)
  4. आसाम, ओडिशा और तेलंगाना राज्य के निवासी यह एप्प डाउनलोड न करें वो इसके लिए मान्य नही है।

Myteam11 में सत्यापन के लिए जरूरी दस्तावेज

  1. मोबाइल नंबर
  2. ईमेल
  3. पैन कार्ड
  4. कोई भी Govt ID Proof
  5. बैंक डिटेल - नाम, बैंक का नाम, अकाउंट नंबर, IFSC आदि

यह भी पढ़े - Dream11 से घर बैठे पैसे कैसे कमाएँ - Free Rs 100 Sign Up Bonus

Myteam11 में कैसे खेले

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  1. MyTeam11 में लॉग इन करें
  2. Myteam11 आपको Free Rs 100 Sign Up Bonus दे रहा है इसलिए आपको शुरू में पैसा इन्वेस्ट करने की जरूरत नही है
  3. लिस्ट में दिया हुआ कोई भी Upcoming मैच सेलेक्ट करें
  4. अपनी Fantasy टीम बनायें
  5. अपना कप्तान और वाईस कप्तान चुनिए
  6. अपनी मनपसंद लीग्स ज्वाइन करें

Myteam11 से संबंधित कुछ जरूरी बातें

  1. Myteam11 पूरी तरह लीगल है ज्यादा जानकारी के लिए आप Myteam11 में जाकर देख सकते है
  2. सत्यापन प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है इसलिए थोडा धैर्य बनाये रखें
  3. अगर आप किसी 1 लीग में 10000 से ज्यादा रूपये जीतते है तो 30.9% टैक्स काटने के बाद आपको पैसे दिए जाएँगे। 

Myteam11 पॉइंट सिस्टम



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8 Apr 2018

भगवद गीता हिंदी में - गीता सार जीवन बदल जाएगा एक बार जरूर पढ़े

भगवद गीता सार हिंदी में

मैंने श्रीमद भगवदगीता तब तक नहीं पढ़ी थी जब तक मुझे यह ज्ञान नहीं हुआ कि हम सब आत्माएं है और यह जिंदगी हम आत्माओं के लिए एक इम्तिहान है अपने अंदर से अपने सबसे अच्छे रूप को बाहर निकालने का और भगवत गीता इस इम्तिहान को पास करने की एक अहम किताब है भगवत गीता के 18 अध्याय हैं और यह संस्कृत में परमात्मा द्वारा दी गई थी, समय के साथ संस्कृत भाषा रोजमर्रा की जिंदगी से निकल गई और यह ज्ञान मनुष्य से दूर हो गया समय-समय पर भगवत गीता के साधारण अक्षरों में अनुवाद किया गया इसी कोशिश को आगे बढ़ाते हुए भगवद गीता के कुछ अहम् हिस्सों को अपने गुरु के आशीर्वाद से एक आसान रूप में मैं अपने करोड़ों भाई-बहनों के चरणों में समर्पित कर रहा हूं।
भगवद गीता
यह ज्ञान परमात्मा ने भगवान कृष्ण के द्वारा सबसे बड़े धर्मयुद्ध महाभारत की रणभूमि कुरुक्षेत्र में अर्जुन को कुछ 5000 साल पहले दिया। यह वह वक्त था जब धर्म का बार-बार उल्लंघन हुआ परमात्मा का डर मनुष्य से निकल गया, लालच की होड़ में भाई ने भाई को मारने की कोशिश की और यही नहीं एक सुहागन औरत को भरी सभा में अपने बड़ों के सामने अपमानित किया गया। इससे पहले के मनुष्य जाति धर्म युग से निकलकर पूर्ण रूप से कलयुग में जाति, युद्ध की रणभूमि में युद्ध से कुछ पहले परमात्मा ने गीता, भगवान कृष्ण के द्वारा मनुष्य जाति के कल्याण के लिए दी। गीता, बाइबल, कुरान और गुरु ग्रन्थ साहिब परमात्मा द्वारा दी गयी किताबें है जो किसी एक धर्म के लिए नहीं बल्कि पूरी मनुष्य जाति के लिए, पूरी इंसानियत के लिए, सब आत्माओं के लिए है क्योंकि यह आत्मा को परमात्मा के बारे में, उसकी सृष्टि के बारे में और उनके बारे में समझती हैं जिनका आत्मा को मनुष्य के रूप में हर हाल में पालन करना होगा, रक्षा करनी होगी और इन्हीं कार्यों की बुनियाद पर एक आत्मा को शरीर त्यागने के बाद परखा जाएगा परीक्षा में पास होने पर हमेशा के लिए जन्म और मृत्यु से मुक्ति मिलेगी.


bhagavad gita
परमात्मा भगवद गीता में कहते हैं कि मैं ही सब की शुरुआत हूं, मैं शुरु से भी पहले था और सब खत्म होने के बाद भी रहूंगा, सब मुझ में है और मैं सब में हूं, जो भी तुम छु सकते हो, देख सकते हो या सुन सकते हो वह सब मैं हु। यह नदियां, पहाड़, सूरज, ग्रहण, चांद, सितारे सब मैंने बनाएं है मैंने ही भगवान, शैतान, राक्षस और इंसान बनाए। मै सर्वव्यापी हु सब में रहता हूं, मैं ही ब्रह्मा बनके सब बनाता हूं और रुद्रा बनके सब नष्ट कर देता हूं. मैं यह सृष्टि यूं ही बनाता और तोड़ता रहूंगा ताकि आत्माओं को मौके मिल सके इस जन्म और मृत्यु से 1 दिन मोक्ष पाने के, हमेशा के लिए परमात्मा के साथ रहने के लिए।

भगवद गीता कहती है की इस सबसे बड़ी परीक्षा के लिए परमात्मा ने प्रकृति का निर्माण पांच तत्व हवा, अग्नि, जल, पृथ्वी और आकाश से किया, जिन्हें हम छू कर, चख कर, सुन कर और देखकर समझ सकते हैं पर खुद परमात्मा इन पांच इंद्रियों की समझ से बाहर है उन्हें आत्मा इन इंद्रियों से नहीं जान सकती। आत्मा पांच इंद्रियों के साथ वैसे ही है जैसे कि लोहे का रोबोट, जिसे अपने बनाने वाले का कोई पता नहीं अर्जुन को भी परमात्मा का विराट रुप देखने के लिए भगवान कृष्ण ने दिव्य नेत्र दिए।

आत्मा क्या है?

भगवत गीता समझाती है कि आत्मा अजन्मी है उसे कोई मार नहीं सकता, कोई जला नहीं सकता, डूबा नहीं सकता, काट नहीं सकता लेकिन आत्मा को परमात्मा के साथ हमेशा रहने के लिए यह परीक्षा रूपी जीवन में बैठना ही पड़ेगा इस परीक्षा के लिए परमात्मा से बिछड़कर आत्मा को पृथ्वी पर किसी न किसी रूप में जन्म लेना पड़ता है और अट्ठासी करोड़ों योनियों को जीने और भोगने के बाद एक आत्मा को मनुष्य का शरीर और दिमाग मिलता है इस सबसे बड़ी मर्यादाओं की परीक्षा में बैठने के लिए, हर मनुष्य को इस पूरी परीक्षा के दौरान तरह-तरह की अच्छी और बुरी भावनाओं के चक्रव्यूह में अपने ही भाई बहन एवं मित्रों के साथ डाला जाता है जिसमें हर आत्मा को अपने अंदर के तामसिक और राजसिक अवगुणों से निकल के सात्विक जीवन में प्रवेश करने के मौके मिलते हैं हमारे तामसिक गुण वह है जो हमारे अंदर हीन भावना पैदा करके हमें खुद को उदास और नुकसान पहुंचाते हैं और हमारे राजसिक गुण हमें ईर्ष्यालु और लोभी बनाकर दूसरों के प्रति नुकसान पहुंचा सकते हैं। इस परीक्षा के दौरान हर आत्मा को तामसिक और राजसिक गुणों को खत्म करके अपने सात्विक गुणों से परिचित होना पड़ेगा सात्विक गुण वह है जो आत्मा को अपने आसपास की हर चीज से जोड़े और उन्हें प्यार करना सिखाते हैं।

जीवन की परीक्षा को समझें

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परीक्षा के दौरान हर आत्मा को जीवन के चार स्तम्भ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का ज्ञान पाकर ही मुक्ति मिलती है यही वो द्वार है जिन्हें समझ के ही आत्मा परमात्मा को समझ सकती है।

भगवद गीता के अनुसार धर्म क्या है?

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पहला द्वार धर्म का है और इसका प्रतीक है शेर, धर्म वही है जो गीता में लिखा हुआ है, वेदों में लिखा हुआ है, बाइबल में लिखा है, गुरु ग्रन्थ साहिब और कुरान में लिखा हुआ है. धर्म वही है जो धारण किया हुआ है जिसे आपका दिल मानता है जैसे झूठ नहीं बोलना, चोरी नहीं करना, भगवान का निरादर नहीं करना दूसरों को नुकसान नहीं देना, यही सब धर्म है और हर आत्मा को अपने जीवन काल में हर समय धर्म का पालन करना होगा और उसकी रक्षा करनी होगी।

भगवद गीता के अनुसार अर्थ क्या है?

दूसरा द्वार अर्थ का है और घोड़ा इसका प्रतीक है हर आत्मा अपने हर जीवन काल में अपने पृथ्वी पर होने का अर्थ या मूल कारण समझे. जिंदगी में भोगने वाली चीजें और रिश्तो का आनंद ले अच्छा बेटा या अच्छी बेटी, अच्छा भाई या अच्छी बहन, अच्छा पति या अच्छी पत्नी बनकर हर दुनियावी रिश्ते पर खरी उतरेगी और इस परीक्षा को पास करेगी।

भगवद गीता के अनुसार काम क्या है?

तीसरा द्वार काम का है, भगवत गीता समझाती है कि हर मनुष्य के अंदर काम,क्रोध,लोभ,मोह,अहंकार और ईर्ष्या जैसी भावनाएं हमें अपने और दूसरों के प्रति नुकसान पहुंचा सकती है इन भावनाओं को हर मनुष्य को हमेशा अपने नियंत्रण में रखना होगा क्योंकि इनके बहाव में किया हुआ कोई भी काम हमारे जीवन भर की परेशानी का कारण बन सकता है और एक आत्मा संतोष और सादगी से इन भावनाओं पर हमेशा के लिए विजय पा सकती है।

भगवद गीता के अनुसार मोक्ष क्या है?

चौथा स्तंभ मोक्ष का है और हाथी इसका प्रतीक है इस परीक्षा रुपी जीवन में हर मनुष्य हर समय कुछ इच्छाएं रखता है कुछ इच्छाएं एक ही जन्मकाल में पूरी हो जाती हैं पर कुछ अधूरी रह जाती हैं और उनके पूरा होने के लिए आत्मा को वापस पृथ्वी पर आना पड़ता है। भगवत गीता समझाती है कि हमारी इच्छाएं ही मूल कारण है हमारे पृथ्वी पर वापस आने का और अगर हम कोई भी इच्छा ना रखे तो हम इस जीवन और मृत्यु से मुक्त हो सकते हैं। यह द्वार माफी का भी है जिन्होंने आपके साथ बुरा किया उनको माफ़ करके और जिनसे आप ने बुरा किया उनसे माफी मांग कर मुक्ति पाई जा सकती है।

जब तक आत्मा इन चारों दरवाजों धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को समझ नहीं लेती तब तक आत्मा को बार-बार इस मनुष्य रूप में आना ही पड़ेगा। परीक्षा का समय खत्म होते ही आत्मा शरीर और अन्य सब वस्तुओं का त्याग कर देती है। जो भी संसार में रहकर बनाया वह अब किसी और का होगा और आत्मा अपने कर्मों के फैसले के लिए चली जाती है। आत्मा के अच्छे बुरे कर्मों का हिसाब होता है अपने अच्छे कर्मों के लिए आत्मा कुछ वक्त के लिए स्वर्ग और दुष्कर्मों के लिए नरक चली जाती है। नरक में आत्मा को अपने पापों के अनुकूल सजाएं मिलती है और सजा खत्म होने के बाद आत्मा को फिर से एक नया शरीर और नया दिमाग मिलता है इस परीक्षा में फिर से बैठने के लिए और हर परीक्षा में वही सब फिर दोहराया जाएगा जिंदगी के चार स्तंभ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को समझने के लिए।  हर जन्म में अपने कई जन्मों के कर्मों के हिसाब से हर आत्मा को कभी अच्छे और कभी बुरे हालातों से जाना पड़ता है लेकिन जब तक आत्मा परमात्मा के साथ योग को नहीं समझ लेती वह मुक्ति नहीं पा सकती।


भगवद गीता के अनुसार भगवन को कैसे प्राप्त करें?

भगवत गीता समझाती है कि मनुष्य अपने शरीर दिमाग या दिल से भगवान को पा सकता है शरीर द्वारा किए कर्मों के माध्यम से परमात्मा को पाने को कर्मयोग कहते हैं ऐसे कर्म जो परमात्मा की इच्छा से हो और दूसरों के कल्याण के लिए हो, वाल्मीकि ने रामायण लिखकर, श्रवन ने अपने माता-पिता की सेवा और उन्हें चार धाम की यात्रा करवा कर, मदर टेरेसा ने अपने प्यार और सेवा के माध्यम से और मैडम क्यूरी ने वैज्ञानिक खोज में अपने जीवन का बलिदान देकर अपने कर्मों द्वारा परमात्मा को पाया। भगवत गीता समझाती है कि आत्मा दिमाग से भी परमात्मा के साथ योग लगा सकती है इसे राजा योग कहते हैं क्योंकि दिमाग या मस्तिष्क सब इंद्रियों का राजा है एक मनुष्य अपनी आस्था, सांस प्रणाली, अभ्यास, साधना और तपस्या से परमात्मा को इस योग के रास्ते पा लेता है। योग को समझने के लिए हमें अपने अंदर की एनर्जी यानी चक्र और कुंडलिनी को समझना पड़ेगा। आत्मा मस्तिस्क से मेडिटेशन या ध्यान लगाकर परमात्मा के साथ योग लगा सकती है। शंकराचार्य, स्वामी परमहंस, स्वामी विवेकानंद और उनके जैसे कई योगी इस योग के रास्ते परमात्मा के साथ संधि लगा पाए।

परमात्मा भगवत गीता में कहते हैं कि अगर किसी आत्मा को धर्म ना भी समझ आए, योग ना भी समझ आए तो अगर वो मेरी शरण में आ जाए तो मैं उसके सारे पाप माफ कर देता हूं परमात्मा को ऐसी दिल की गहराइयों से पुकार के पाने को भक्ति योग कहते हैं। चैतन्य महाप्रभु, मीराबाई और भगवान हनुमान इस योग के सबसे बड़े उदाहरण है लेकिन कभी आत्मा अपने होने का मूल कारण भूलकर धर्म का उल्लंघन करें या पाप के रास्ते पर निकल जाए तो उसे ठीक करने के लिए परमात्मा खुद किसी रूप में पृथ्वी पर जन्म लेते हैं।

आइए श्री भगवत गीता, गुरु ग्रंथ साहिब, बाइबल, कुरान या ऐसी किसी भी किताब को पूरा पढ़ कर इस जिंदगी के असली मायने समझें और परमात्मा के साथ योग लगाएं। अगर आपने इस पोस्ट को पसंद किया तो इसे अन्य के साथ भी बाटें ताकि सब आत्माएं अपने यहां होने का मूल रूप समझ सके और इस जन्म और मृत्यु से मुक्ति पा के हमेशा परमात्मा के साथ रहें।

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31 Mar 2018

हनुमान चालीसा हिंदी में

हनुमान चालीसा हिंदी में

दोहा

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।
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30 Mar 2018

Anandi Gopal Joshi मेडिसिन में डिग्री प्राप्त करने वाली प्रथम भारतीय महिला जीवन परिचय

आनंदी गोपाल जोशी मेडिसिन में डिग्री प्राप्त करने वाली प्रथम भारतीय महिला

आनंदी गोपाल भारत की प्रथम महिला डॉक्टर, आनंदी गोपाल भारत के सामाजिक सुधार के इतिहास का एक सुनहरा पन्ना, आनंदी गोपाल सामाजिक विरोध और क्रोध की परवाह किए बगैर भविष्य की दिशा में उठाया गया एक क्रांतिकारी कदम ऐसी थी आनंदी गोपाल, आज 31 मार्च को उनके जन्म दिन पर हम पेश कर रहे है उनका प्रेरणादायक जीवन परिचय


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डॉक्टर आनंदी गोपाल जोशी का जन्म 31 मार्च 1865 को पूणा में एक समृद्ध लेकिन रुढ़िवादी ब्राह्मण परिवार में हुआ था उनके पिता गणपत राव अमृतसर जोशी और मां गंगा बाई जोशी थी। जन्म के समय आनंदी बाई का नाम यमुना रखा गया था 9 साल की कच्ची उम्र में ही यमुना का विवाह गोपाल विनायक जोशी से करा दिया गया जो उनसे उम्र में 20 साल बड़े थे। शादी के बाद उनका नाम बदलकर आनंदीबाई रख दिया गया 14 साल की उम्र में आनंदी बाई ने एक बेटे को जन्म दिया लेकिन 10 दिन के अंदर मेडिकल सेवाओं की कमी के चलते उसकी मृत्यु हो गई इस हादसे ने आनंदी बाई का जीवन बदल दिया और उन्हें डॉक्टर बनने के लिए एक प्रेरित किया उनके पति एक प्रगतिशील विचारक थे और महिला शिक्षा का समर्थन करते थे उन्होंने आनंदी बाई का डॉक्टर बनने में पूरा साथ दिया और उन्हें पढ़ाई करने के लिए अमेरिका भेजने का फैसला किया। 


अमेरिका जा कर पढ़ाई करने के फैसले का उस समय के हिंदू समाज ने कड़ा विरोध किया लेकिन आनंदी बाई ने धर्म की परवाह नहीं कि धर्म के बारे में उनका मत था कि कोई भी धर्म बुरा नहीं होता बल्कि उसके अनुयाई और व्याख्याकार उसे बुरा बना देते हैं आनंदी बाई की लगन का ही परिणाम था कि 4 जून 1883 को आनंदी बाई ने अमेरिका की जमीन पर कदम रखा है वो किसी भी विदेशी जमीन पर कदम रखने वाली पहली हिंदू महिला थी। 

न्यू जर्सी में रहने वाली थियोदिसिया कारपेंटर ने पढ़ाई के दौरान उनका साथ दिया आनंदी बाई ने पेंसिवेल्निया के महिला मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया था हलाकि वहाँ प्रवास के दौरान उन्हें टीवी की बीमारी ने जकड़ लिया लेकिन हार न मानते हुए उन्होंने 11 मार्च 1886 को MD की डिग्री हासिल की। 

साल 1886 में वो वापस भारत लौटी और कोल्हापुर के एडवर्ड अल्बर्ट अस्पताल में उन्हें महिला वार्ड का फिजिशियन इंचार्ज नियुक्त किया गया लेकिन इससे पहले कि वह अपनी कड़ी मेहनत से मिले फल से अपने सपनों को पूरा कर पाती 26 फरवरी 1887 को 21 साल की उम्र में उनकी मृत्यु हो गई भले ही डॉक्टर आनंदीबाई एक डॉक्टर के रूप में अपनी सेवाएं ज्यादा नहीं दे पाई लेकिन प्रेम, ईमानदारी और सच्चाई जैसे मूल्यों पर विश्वास करने वाली यह महिला चार दीवारों में कैद लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।



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26 Mar 2018

Chipko Movement all info in hindi

चिपको आन्दोलन पूरी जानकारी हिंदी में

यह बात बहुत पुरानी है आज से बहुत वर्ष पहले गढ़वाल की पहाड़ियों में एक गांव बसा था गांव का नाम था रैंणी, चारों ओर ऊंचे-ऊंचे पहाड़ घने जंगल झर-झर बहते झरने और नदी नाले थे घाटियों में बहती हुई हवा फूलों की सुगंध को चारों ओर फैला देती थी। बहुत ही सुंदर था यह गांव इस गांव के लोगों का काम था खेती-बाड़ी और पशुपालन करना उनकी सारी जरूरतें जंगल से ही पूरी होती थी दिन भर जंगलों और खेतों में काम करने के बाद लोग जब शाम को अपने घर वापस आते तो उनके नृत्य और लोक गीतों की मधुर आवाज सारे पहाड़ों में गूंजने लगती। जंगल ही इनका सब कुछ था उन्हें जंगल से वैसा ही लगाव था जैसा अपने परिवारजनों से था जंगल के पेड़ उनके जीवन का अंग थे।
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रैंणी गांव के लोगों का जीवन बड़े ही संतोष से बीत रहा था इसी गांव में गौरा देवी नाम की एक युवती रहती थी वह बड़ी बहादुर और मेहनती थी गांव के और लोगों की तरह वह भी दिन भर जंगल में ही रहती थी जलाने के लिए सूखी लकड़ियां, फल-फूल, कंदमूल और शहद इकट्ठा करती थी।



एक दिन की बात है हमेशा की तरह गौरा अपनी सहेलियों के साथ जंगल में गई थी, गौरा और उसकी सहेलियां गूलर के फलों को इकट्ठा करने के लिए जंगल में काफी दूर निकल गई, घूमते-घूमते वह अलकनंदा नदी के किनारे पहुची यहाँ उन्होंने देखा बाहर से आये लोग जंगल के पेड़ काटने की तैयारी कर रहे है फिर क्या था गौरा देवी ने योजना बनायी की गाँव जाकर और लोगो को बुलाया जाये ताकि इन लोगो को पेड़ काटने से रोक सके और अपनी सभी सहेलियों के साथ फौरन अपने गांव की ओर चल पड़ी कटीली झाड़ियों में उनके कपड़े फट गए, खरोंचे लगी, प्यास के मारे उनका बुरा हाल हो गया, पथरीली जमीन से पांव लहूलुहान हो गए मगर बिना रुके वह दौड़ती रही दौड़ती रही उनके सामने एक ही लक्ष्य था अपने पेड़ों को कटने से बचाना। 


चिपको आन्दोलन
थकी-हारी जब वह गांव में पहुंची तो दोपहर हो चुकी थी पुरुष काम करने खेतों में गए हुए थे इसलिए एक भी पुरुष उस समय गांव में नहीं मिला और फिर गौरा देवी चल पड़ी जंगल को बचाने उसके साथ 21 स्त्रियाँ और 7 बच्चे थे सभी के सभी निहत्थे थे। उन्हें एक तरकीब सूझी सबसे पहला काम उन्होंने यह किया कि जगह-जगह पत्थरों के ढेर लगा कर उन्होंने रास्तों को लगभग बंद कर दिया ताकि शहर के लोग यदि उन कटे पेड़ों को ले जाना भी चाहें तो यह संभव ना हो सके अब सारी स्त्रियां आगे बढ़ी और पहुंची उस जगह पर जहां पेड़ काटे जा रहे थे उन्होंने बाहर से आये लोगो को रोका और कहा - ‘ये पेड़ हमारे भाई है और इनकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है इन्ही पेड़ों के कारण हम श्वांश लेते है और यही पेड़ हमे फल भी देते है इन्हें हम नही काटने देंगे भले ही इसके लिए हमे अपने प्राण ही क्यों न देने पड़ जाएँ’ और ऐसा कहते ही सभी बच्चे और स्त्रियाँ पेड़ों से चिपक गयी।  पेड़ काटने आये लोगो ने उन्हें हटाना और उनसे झगड़ना शुरू कर दिया। इधर जंगल में यह हो रहा था और इधर आस-पास के गांव में यह खबर आग की तरह फैल गई गांव से लोग हथियार लेकर वहां आने लगे जब पेड़ काटने वालों ने देखा कि अब उनकी दाल नहीं गल सकती तो फिर क्या था उन्होंने वहां से भागने में ही अपनी भलाई समझी और सर पर पाँव रखकर भाग खड़े हुए। 



सभी ने गौरा देवी और स्त्रियों के साहस की पूरी-पूरी प्रशंसा की तो दोस्तों इस तरह इसी रैणी गांव से शुरुआत हुई चिपको आंदोलन की जो आज सारे संसार में प्रसिद्ध हो गया है। 
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