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8 Apr 2018

भगवद गीता हिंदी में - गीता सार जीवन बदल जाएगा एक बार जरूर पढ़े

भगवद गीता सार हिंदी में

मैंने श्रीमद भगवदगीता तब तक नहीं पढ़ी थी जब तक मुझे यह ज्ञान नहीं हुआ कि हम सब आत्माएं है और यह जिंदगी हम आत्माओं के लिए एक इम्तिहान है अपने अंदर से अपने सबसे अच्छे रूप को बाहर निकालने का और भगवत गीता इस इम्तिहान को पास करने की एक अहम किताब है भगवत गीता के 18 अध्याय हैं और यह संस्कृत में परमात्मा द्वारा दी गई थी, समय के साथ संस्कृत भाषा रोजमर्रा की जिंदगी से निकल गई और यह ज्ञान मनुष्य से दूर हो गया समय-समय पर भगवत गीता के साधारण अक्षरों में अनुवाद किया गया इसी कोशिश को आगे बढ़ाते हुए भगवद गीता के कुछ अहम् हिस्सों को अपने गुरु के आशीर्वाद से एक आसान रूप में मैं अपने करोड़ों भाई-बहनों के चरणों में समर्पित कर रहा हूं।
भगवद गीता
यह ज्ञान परमात्मा ने भगवान कृष्ण के द्वारा सबसे बड़े धर्मयुद्ध महाभारत की रणभूमि कुरुक्षेत्र में अर्जुन को कुछ 5000 साल पहले दिया। यह वह वक्त था जब धर्म का बार-बार उल्लंघन हुआ परमात्मा का डर मनुष्य से निकल गया, लालच की होड़ में भाई ने भाई को मारने की कोशिश की और यही नहीं एक सुहागन औरत को भरी सभा में अपने बड़ों के सामने अपमानित किया गया। इससे पहले के मनुष्य जाति धर्म युग से निकलकर पूर्ण रूप से कलयुग में जाति, युद्ध की रणभूमि में युद्ध से कुछ पहले परमात्मा ने गीता, भगवान कृष्ण के द्वारा मनुष्य जाति के कल्याण के लिए दी। गीता, बाइबल, कुरान और गुरु ग्रन्थ साहिब परमात्मा द्वारा दी गयी किताबें है जो किसी एक धर्म के लिए नहीं बल्कि पूरी मनुष्य जाति के लिए, पूरी इंसानियत के लिए, सब आत्माओं के लिए है क्योंकि यह आत्मा को परमात्मा के बारे में, उसकी सृष्टि के बारे में और उनके बारे में समझती हैं जिनका आत्मा को मनुष्य के रूप में हर हाल में पालन करना होगा, रक्षा करनी होगी और इन्हीं कार्यों की बुनियाद पर एक आत्मा को शरीर त्यागने के बाद परखा जाएगा परीक्षा में पास होने पर हमेशा के लिए जन्म और मृत्यु से मुक्ति मिलेगी.


bhagavad gita
परमात्मा भगवद गीता में कहते हैं कि मैं ही सब की शुरुआत हूं, मैं शुरु से भी पहले था और सब खत्म होने के बाद भी रहूंगा, सब मुझ में है और मैं सब में हूं, जो भी तुम छु सकते हो, देख सकते हो या सुन सकते हो वह सब मैं हु। यह नदियां, पहाड़, सूरज, ग्रहण, चांद, सितारे सब मैंने बनाएं है मैंने ही भगवान, शैतान, राक्षस और इंसान बनाए। मै सर्वव्यापी हु सब में रहता हूं, मैं ही ब्रह्मा बनके सब बनाता हूं और रुद्रा बनके सब नष्ट कर देता हूं. मैं यह सृष्टि यूं ही बनाता और तोड़ता रहूंगा ताकि आत्माओं को मौके मिल सके इस जन्म और मृत्यु से 1 दिन मोक्ष पाने के, हमेशा के लिए परमात्मा के साथ रहने के लिए।

भगवद गीता कहती है की इस सबसे बड़ी परीक्षा के लिए परमात्मा ने प्रकृति का निर्माण पांच तत्व हवा, अग्नि, जल, पृथ्वी और आकाश से किया, जिन्हें हम छू कर, चख कर, सुन कर और देखकर समझ सकते हैं पर खुद परमात्मा इन पांच इंद्रियों की समझ से बाहर है उन्हें आत्मा इन इंद्रियों से नहीं जान सकती। आत्मा पांच इंद्रियों के साथ वैसे ही है जैसे कि लोहे का रोबोट, जिसे अपने बनाने वाले का कोई पता नहीं अर्जुन को भी परमात्मा का विराट रुप देखने के लिए भगवान कृष्ण ने दिव्य नेत्र दिए।

आत्मा क्या है?

भगवत गीता समझाती है कि आत्मा अजन्मी है उसे कोई मार नहीं सकता, कोई जला नहीं सकता, डूबा नहीं सकता, काट नहीं सकता लेकिन आत्मा को परमात्मा के साथ हमेशा रहने के लिए यह परीक्षा रूपी जीवन में बैठना ही पड़ेगा इस परीक्षा के लिए परमात्मा से बिछड़कर आत्मा को पृथ्वी पर किसी न किसी रूप में जन्म लेना पड़ता है और अट्ठासी करोड़ों योनियों को जीने और भोगने के बाद एक आत्मा को मनुष्य का शरीर और दिमाग मिलता है इस सबसे बड़ी मर्यादाओं की परीक्षा में बैठने के लिए, हर मनुष्य को इस पूरी परीक्षा के दौरान तरह-तरह की अच्छी और बुरी भावनाओं के चक्रव्यूह में अपने ही भाई बहन एवं मित्रों के साथ डाला जाता है जिसमें हर आत्मा को अपने अंदर के तामसिक और राजसिक अवगुणों से निकल के सात्विक जीवन में प्रवेश करने के मौके मिलते हैं हमारे तामसिक गुण वह है जो हमारे अंदर हीन भावना पैदा करके हमें खुद को उदास और नुकसान पहुंचाते हैं और हमारे राजसिक गुण हमें ईर्ष्यालु और लोभी बनाकर दूसरों के प्रति नुकसान पहुंचा सकते हैं। इस परीक्षा के दौरान हर आत्मा को तामसिक और राजसिक गुणों को खत्म करके अपने सात्विक गुणों से परिचित होना पड़ेगा सात्विक गुण वह है जो आत्मा को अपने आसपास की हर चीज से जोड़े और उन्हें प्यार करना सिखाते हैं।

जीवन की परीक्षा को समझें

bhagavad gita in hindi
परीक्षा के दौरान हर आत्मा को जीवन के चार स्तम्भ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का ज्ञान पाकर ही मुक्ति मिलती है यही वो द्वार है जिन्हें समझ के ही आत्मा परमात्मा को समझ सकती है।

भगवद गीता के अनुसार धर्म क्या है?

bhagvat geeta
पहला द्वार धर्म का है और इसका प्रतीक है शेर, धर्म वही है जो गीता में लिखा हुआ है, वेदों में लिखा हुआ है, बाइबल में लिखा है, गुरु ग्रन्थ साहिब और कुरान में लिखा हुआ है. धर्म वही है जो धारण किया हुआ है जिसे आपका दिल मानता है जैसे झूठ नहीं बोलना, चोरी नहीं करना, भगवान का निरादर नहीं करना दूसरों को नुकसान नहीं देना, यही सब धर्म है और हर आत्मा को अपने जीवन काल में हर समय धर्म का पालन करना होगा और उसकी रक्षा करनी होगी।

भगवद गीता के अनुसार अर्थ क्या है?

दूसरा द्वार अर्थ का है और घोड़ा इसका प्रतीक है हर आत्मा अपने हर जीवन काल में अपने पृथ्वी पर होने का अर्थ या मूल कारण समझे. जिंदगी में भोगने वाली चीजें और रिश्तो का आनंद ले अच्छा बेटा या अच्छी बेटी, अच्छा भाई या अच्छी बहन, अच्छा पति या अच्छी पत्नी बनकर हर दुनियावी रिश्ते पर खरी उतरेगी और इस परीक्षा को पास करेगी।

भगवद गीता के अनुसार काम क्या है?

तीसरा द्वार काम का है, भगवत गीता समझाती है कि हर मनुष्य के अंदर काम,क्रोध,लोभ,मोह,अहंकार और ईर्ष्या जैसी भावनाएं हमें अपने और दूसरों के प्रति नुकसान पहुंचा सकती है इन भावनाओं को हर मनुष्य को हमेशा अपने नियंत्रण में रखना होगा क्योंकि इनके बहाव में किया हुआ कोई भी काम हमारे जीवन भर की परेशानी का कारण बन सकता है और एक आत्मा संतोष और सादगी से इन भावनाओं पर हमेशा के लिए विजय पा सकती है।

भगवद गीता के अनुसार मोक्ष क्या है?

चौथा स्तंभ मोक्ष का है और हाथी इसका प्रतीक है इस परीक्षा रुपी जीवन में हर मनुष्य हर समय कुछ इच्छाएं रखता है कुछ इच्छाएं एक ही जन्मकाल में पूरी हो जाती हैं पर कुछ अधूरी रह जाती हैं और उनके पूरा होने के लिए आत्मा को वापस पृथ्वी पर आना पड़ता है। भगवत गीता समझाती है कि हमारी इच्छाएं ही मूल कारण है हमारे पृथ्वी पर वापस आने का और अगर हम कोई भी इच्छा ना रखे तो हम इस जीवन और मृत्यु से मुक्त हो सकते हैं। यह द्वार माफी का भी है जिन्होंने आपके साथ बुरा किया उनको माफ़ करके और जिनसे आप ने बुरा किया उनसे माफी मांग कर मुक्ति पाई जा सकती है।

जब तक आत्मा इन चारों दरवाजों धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को समझ नहीं लेती तब तक आत्मा को बार-बार इस मनुष्य रूप में आना ही पड़ेगा। परीक्षा का समय खत्म होते ही आत्मा शरीर और अन्य सब वस्तुओं का त्याग कर देती है। जो भी संसार में रहकर बनाया वह अब किसी और का होगा और आत्मा अपने कर्मों के फैसले के लिए चली जाती है। आत्मा के अच्छे बुरे कर्मों का हिसाब होता है अपने अच्छे कर्मों के लिए आत्मा कुछ वक्त के लिए स्वर्ग और दुष्कर्मों के लिए नरक चली जाती है। नरक में आत्मा को अपने पापों के अनुकूल सजाएं मिलती है और सजा खत्म होने के बाद आत्मा को फिर से एक नया शरीर और नया दिमाग मिलता है इस परीक्षा में फिर से बैठने के लिए और हर परीक्षा में वही सब फिर दोहराया जाएगा जिंदगी के चार स्तंभ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को समझने के लिए।  हर जन्म में अपने कई जन्मों के कर्मों के हिसाब से हर आत्मा को कभी अच्छे और कभी बुरे हालातों से जाना पड़ता है लेकिन जब तक आत्मा परमात्मा के साथ योग को नहीं समझ लेती वह मुक्ति नहीं पा सकती।


भगवद गीता के अनुसार भगवन को कैसे प्राप्त करें?

भगवत गीता समझाती है कि मनुष्य अपने शरीर दिमाग या दिल से भगवान को पा सकता है शरीर द्वारा किए कर्मों के माध्यम से परमात्मा को पाने को कर्मयोग कहते हैं ऐसे कर्म जो परमात्मा की इच्छा से हो और दूसरों के कल्याण के लिए हो, वाल्मीकि ने रामायण लिखकर, श्रवन ने अपने माता-पिता की सेवा और उन्हें चार धाम की यात्रा करवा कर, मदर टेरेसा ने अपने प्यार और सेवा के माध्यम से और मैडम क्यूरी ने वैज्ञानिक खोज में अपने जीवन का बलिदान देकर अपने कर्मों द्वारा परमात्मा को पाया। भगवत गीता समझाती है कि आत्मा दिमाग से भी परमात्मा के साथ योग लगा सकती है इसे राजा योग कहते हैं क्योंकि दिमाग या मस्तिष्क सब इंद्रियों का राजा है एक मनुष्य अपनी आस्था, सांस प्रणाली, अभ्यास, साधना और तपस्या से परमात्मा को इस योग के रास्ते पा लेता है। योग को समझने के लिए हमें अपने अंदर की एनर्जी यानी चक्र और कुंडलिनी को समझना पड़ेगा। आत्मा मस्तिस्क से मेडिटेशन या ध्यान लगाकर परमात्मा के साथ योग लगा सकती है। शंकराचार्य, स्वामी परमहंस, स्वामी विवेकानंद और उनके जैसे कई योगी इस योग के रास्ते परमात्मा के साथ संधि लगा पाए।

परमात्मा भगवत गीता में कहते हैं कि अगर किसी आत्मा को धर्म ना भी समझ आए, योग ना भी समझ आए तो अगर वो मेरी शरण में आ जाए तो मैं उसके सारे पाप माफ कर देता हूं परमात्मा को ऐसी दिल की गहराइयों से पुकार के पाने को भक्ति योग कहते हैं। चैतन्य महाप्रभु, मीराबाई और भगवान हनुमान इस योग के सबसे बड़े उदाहरण है लेकिन कभी आत्मा अपने होने का मूल कारण भूलकर धर्म का उल्लंघन करें या पाप के रास्ते पर निकल जाए तो उसे ठीक करने के लिए परमात्मा खुद किसी रूप में पृथ्वी पर जन्म लेते हैं।

आइए श्री भगवत गीता, गुरु ग्रंथ साहिब, बाइबल, कुरान या ऐसी किसी भी किताब को पूरा पढ़ कर इस जिंदगी के असली मायने समझें और परमात्मा के साथ योग लगाएं। अगर आपने इस पोस्ट को पसंद किया तो इसे अन्य के साथ भी बाटें ताकि सब आत्माएं अपने यहां होने का मूल रूप समझ सके और इस जन्म और मृत्यु से मुक्ति पा के हमेशा परमात्मा के साथ रहें।

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31 Mar 2018

हनुमान चालीसा हिंदी में

हनुमान चालीसा हिंदी में

दोहा

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।
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30 Mar 2018

Anandi Gopal Joshi मेडिसिन में डिग्री प्राप्त करने वाली प्रथम भारतीय महिला जीवन परिचय

आनंदी गोपाल जोशी मेडिसिन में डिग्री प्राप्त करने वाली प्रथम भारतीय महिला

आनंदी गोपाल भारत की प्रथम महिला डॉक्टर, आनंदी गोपाल भारत के सामाजिक सुधार के इतिहास का एक सुनहरा पन्ना, आनंदी गोपाल सामाजिक विरोध और क्रोध की परवाह किए बगैर भविष्य की दिशा में उठाया गया एक क्रांतिकारी कदम ऐसी थी आनंदी गोपाल, आज 31 मार्च को उनके जन्म दिन पर हम पेश कर रहे है उनका प्रेरणादायक जीवन परिचय


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डॉक्टर आनंदी गोपाल जोशी का जन्म 31 मार्च 1865 को पूणा में एक समृद्ध लेकिन रुढ़िवादी ब्राह्मण परिवार में हुआ था उनके पिता गणपत राव अमृतसर जोशी और मां गंगा बाई जोशी थी। जन्म के समय आनंदी बाई का नाम यमुना रखा गया था 9 साल की कच्ची उम्र में ही यमुना का विवाह गोपाल विनायक जोशी से करा दिया गया जो उनसे उम्र में 20 साल बड़े थे। शादी के बाद उनका नाम बदलकर आनंदीबाई रख दिया गया 14 साल की उम्र में आनंदी बाई ने एक बेटे को जन्म दिया लेकिन 10 दिन के अंदर मेडिकल सेवाओं की कमी के चलते उसकी मृत्यु हो गई इस हादसे ने आनंदी बाई का जीवन बदल दिया और उन्हें डॉक्टर बनने के लिए एक प्रेरित किया उनके पति एक प्रगतिशील विचारक थे और महिला शिक्षा का समर्थन करते थे उन्होंने आनंदी बाई का डॉक्टर बनने में पूरा साथ दिया और उन्हें पढ़ाई करने के लिए अमेरिका भेजने का फैसला किया। 


अमेरिका जा कर पढ़ाई करने के फैसले का उस समय के हिंदू समाज ने कड़ा विरोध किया लेकिन आनंदी बाई ने धर्म की परवाह नहीं कि धर्म के बारे में उनका मत था कि कोई भी धर्म बुरा नहीं होता बल्कि उसके अनुयाई और व्याख्याकार उसे बुरा बना देते हैं आनंदी बाई की लगन का ही परिणाम था कि 4 जून 1883 को आनंदी बाई ने अमेरिका की जमीन पर कदम रखा है वो किसी भी विदेशी जमीन पर कदम रखने वाली पहली हिंदू महिला थी। 

न्यू जर्सी में रहने वाली थियोदिसिया कारपेंटर ने पढ़ाई के दौरान उनका साथ दिया आनंदी बाई ने पेंसिवेल्निया के महिला मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया था हलाकि वहाँ प्रवास के दौरान उन्हें टीवी की बीमारी ने जकड़ लिया लेकिन हार न मानते हुए उन्होंने 11 मार्च 1886 को MD की डिग्री हासिल की। 

साल 1886 में वो वापस भारत लौटी और कोल्हापुर के एडवर्ड अल्बर्ट अस्पताल में उन्हें महिला वार्ड का फिजिशियन इंचार्ज नियुक्त किया गया लेकिन इससे पहले कि वह अपनी कड़ी मेहनत से मिले फल से अपने सपनों को पूरा कर पाती 26 फरवरी 1887 को 21 साल की उम्र में उनकी मृत्यु हो गई भले ही डॉक्टर आनंदीबाई एक डॉक्टर के रूप में अपनी सेवाएं ज्यादा नहीं दे पाई लेकिन प्रेम, ईमानदारी और सच्चाई जैसे मूल्यों पर विश्वास करने वाली यह महिला चार दीवारों में कैद लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।



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26 Mar 2018

Chipko Movement all info in hindi

चिपको आन्दोलन पूरी जानकारी हिंदी में

यह बात बहुत पुरानी है आज से बहुत वर्ष पहले गढ़वाल की पहाड़ियों में एक गांव बसा था गांव का नाम था रैंणी, चारों ओर ऊंचे-ऊंचे पहाड़ घने जंगल झर-झर बहते झरने और नदी नाले थे घाटियों में बहती हुई हवा फूलों की सुगंध को चारों ओर फैला देती थी। बहुत ही सुंदर था यह गांव इस गांव के लोगों का काम था खेती-बाड़ी और पशुपालन करना उनकी सारी जरूरतें जंगल से ही पूरी होती थी दिन भर जंगलों और खेतों में काम करने के बाद लोग जब शाम को अपने घर वापस आते तो उनके नृत्य और लोक गीतों की मधुर आवाज सारे पहाड़ों में गूंजने लगती। जंगल ही इनका सब कुछ था उन्हें जंगल से वैसा ही लगाव था जैसा अपने परिवारजनों से था जंगल के पेड़ उनके जीवन का अंग थे।
Chipko Movement all info in hindi
रैंणी गांव के लोगों का जीवन बड़े ही संतोष से बीत रहा था इसी गांव में गौरा देवी नाम की एक युवती रहती थी वह बड़ी बहादुर और मेहनती थी गांव के और लोगों की तरह वह भी दिन भर जंगल में ही रहती थी जलाने के लिए सूखी लकड़ियां, फल-फूल, कंदमूल और शहद इकट्ठा करती थी।



एक दिन की बात है हमेशा की तरह गौरा अपनी सहेलियों के साथ जंगल में गई थी, गौरा और उसकी सहेलियां गूलर के फलों को इकट्ठा करने के लिए जंगल में काफी दूर निकल गई, घूमते-घूमते वह अलकनंदा नदी के किनारे पहुची यहाँ उन्होंने देखा बाहर से आये लोग जंगल के पेड़ काटने की तैयारी कर रहे है फिर क्या था गौरा देवी ने योजना बनायी की गाँव जाकर और लोगो को बुलाया जाये ताकि इन लोगो को पेड़ काटने से रोक सके और अपनी सभी सहेलियों के साथ फौरन अपने गांव की ओर चल पड़ी कटीली झाड़ियों में उनके कपड़े फट गए, खरोंचे लगी, प्यास के मारे उनका बुरा हाल हो गया, पथरीली जमीन से पांव लहूलुहान हो गए मगर बिना रुके वह दौड़ती रही दौड़ती रही उनके सामने एक ही लक्ष्य था अपने पेड़ों को कटने से बचाना। 


चिपको आन्दोलन
थकी-हारी जब वह गांव में पहुंची तो दोपहर हो चुकी थी पुरुष काम करने खेतों में गए हुए थे इसलिए एक भी पुरुष उस समय गांव में नहीं मिला और फिर गौरा देवी चल पड़ी जंगल को बचाने उसके साथ 21 स्त्रियाँ और 7 बच्चे थे सभी के सभी निहत्थे थे। उन्हें एक तरकीब सूझी सबसे पहला काम उन्होंने यह किया कि जगह-जगह पत्थरों के ढेर लगा कर उन्होंने रास्तों को लगभग बंद कर दिया ताकि शहर के लोग यदि उन कटे पेड़ों को ले जाना भी चाहें तो यह संभव ना हो सके अब सारी स्त्रियां आगे बढ़ी और पहुंची उस जगह पर जहां पेड़ काटे जा रहे थे उन्होंने बाहर से आये लोगो को रोका और कहा - ‘ये पेड़ हमारे भाई है और इनकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है इन्ही पेड़ों के कारण हम श्वांश लेते है और यही पेड़ हमे फल भी देते है इन्हें हम नही काटने देंगे भले ही इसके लिए हमे अपने प्राण ही क्यों न देने पड़ जाएँ’ और ऐसा कहते ही सभी बच्चे और स्त्रियाँ पेड़ों से चिपक गयी।  पेड़ काटने आये लोगो ने उन्हें हटाना और उनसे झगड़ना शुरू कर दिया। इधर जंगल में यह हो रहा था और इधर आस-पास के गांव में यह खबर आग की तरह फैल गई गांव से लोग हथियार लेकर वहां आने लगे जब पेड़ काटने वालों ने देखा कि अब उनकी दाल नहीं गल सकती तो फिर क्या था उन्होंने वहां से भागने में ही अपनी भलाई समझी और सर पर पाँव रखकर भाग खड़े हुए। 



सभी ने गौरा देवी और स्त्रियों के साहस की पूरी-पूरी प्रशंसा की तो दोस्तों इस तरह इसी रैणी गांव से शुरुआत हुई चिपको आंदोलन की जो आज सारे संसार में प्रसिद्ध हो गया है। 
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24 Mar 2018

सोनम कपूर और आनंद आहूजा की प्रेम कहानी हिंदी में

सोनम कपूर और आनंद आहूजा की प्रेम कहानी

सोनम कपूर बॉलीवुड की टॉप फैशन डिवा है जो न केवल अपने फैशन के लिए मशहूर है बल्कि उनकी अभिनय क्षमता भी कमाल की है। दूसरी तरफ, आनंद अहुजा दिल्ली स्थित एक सुखी, सफल और समृद्ध व्यापारी है जो फैशन ब्रांड 'Bhane' के मालिक है और भारत के पहली स्नीकर स्टोर 'Veg Non Veg' के सह-मालिक भी हैं।



सोनम कपूर और आनंद आहूजा
कैसे मिले सोनम कपूर और आनंद अहुजा?
सूत्रों की माने तो आनंद आहूजा, सोनम कपूर के फैशन के कारण उनकी ओर आकर्षित हुए थे। यह सब लगभग 2015 की शुरुआत में, Instagram के माध्यम से शुरू हुआ जब दोनों ने एक-दूसरे को Instagram में फॉलो किया, क्योंकि दोनों में एक चीज आम थी जो था फैशन। इसके बाद में इन दोनों को बहुत सी जगहों में भी एक साथ घूमता हुआ देखा गया लेकिन वो दोनों अपने रिश्ते के बारे में इनकार करते रहे और अपने आपको महज अच्छा दोस्त बताते रहे।
आनंद आहूजा सोनम कपूर
उनके बीच कोई रिश्ते होने की बात ने तब मजबूती पकड़ी जब सोनम और आनंद की तस्वीर अक्षय कुमार की पार्टी में विल स्मिथ के साथ Instagram पर वायरल हो गई थी।

anand ahuja pics
इसके बाद इस जोड़ी ने अपनी यात्राओं के दौरान अपनी पिक्चर शेयर करना शुरू कर दिया जो न केवल भारत की थी बल्कि भारत से बहार की भी थी। उनका पहला विदेशी दौरा 2017 के ग्रीष्मकाल में आया जब वे यूनाइटेड किंगडम गए, जहां उन्होंने खरीदारी करते हुए और लंदन की क्लासिक गलियों में घुमते हुए अपनी फोटो शेयर की। 
sonam kapoor pitcher
3 मई 2017 को, उनके रिश्ते राष्ट्रीय समाचार बन गए, जब सोनम नई दिल्ली में 64 वें राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में उनके पिता, अभिनेता अनिल कपूर और प्रेमी आनंद अहुजा के साथ दिखाई दी जहाँ उन्हें उनके शानदार प्रदर्शन के लिए अपना पहला राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया। 
सोनम कपूर और आनंद आहूजा की प्रेम कहानी हिंदी में
अब हाल ही में उनकी शादी को लेकर बहुत सी बाते की जा रही है माना जा रहा है की सोनम कपूर अपने प्रेमी आनंद आहूजा के साथ जून 2018 में शादी करने वाली है अब बस इन्तजार है तो कपूर परिवार के ऑफिसियल स्टेटमेंट का जिसके आते ही उनके शादी की खबर में पक्की होने के मोहर लग जाएगी।

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18 Mar 2018

अंतरिक्ष की परी कल्पना चावला का जीवन परिचय हिंदी में

कल्पना चावला का जीवन परिचय

कल्पना चावला(अंतरिक्ष की परी) -
इस दुनिया में जन्मे सभी लोगों को एक ना एक दिन इस खूबसूरत दुनिया को छोड़ कर जाना होता है मगर दुनिया में कुछ लोग सिर्फ जीने के लिए आते हैं मौत तो महज़ उनके शरीर को खत्म करती है आज मैं बात करने जा रहा हूं भारत की बहादुर बेटी कल्पना चावला की भले ही 1 फरवरी 2003 को कोलंबिया स्पेस शटल के दुर्घटनाग्रस्त होने के साथ कल्पना की उड़ान रुक गई लेकिन आज भी वह दुनिया के लिए एक मिसाल है।



सोच को कोई नही रोक सकता-
सोच हमेशा उड़ान भरती आई है और भरती रहेगी, अंतरिक्ष की परी कही जाने वाली कल्पना चावला का जन्म हरियाणा के करनाल में हुआ था, कल्पना अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय महिला थी उनके पिता का नाम बनारसी लाल और मां का नाम संज्योती है बचपन में सभी लोग उन्हें मोटू कह कर बुलाते थे। 
kalpana chawla biography in hindi
कल्पना नाम के अनुरूप ही बचपन से वो बहुत कल्पना भरी सोच रखती थी वह हमेशा आकाश और उसकी ऊंचाइयों के बारे में सोचती रहती थी। अपने पापा से विमान और चांद-तारों के बारे में बात किया करती थी। कल्पना की प्रारंभिक पढाई करनाल के टैगोर स्कूल में हुई फिर कल्पना ने 1982 में चंडीगढ़ इंजीनियरिंग कॉलेज से एरोनोटीकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली इसके बाद वो अपने सपनो को पूरा करने अमेरिका चली गयी यहाँ उन्होंने किसी यूनिवर्सिटी से P.Hd की उपाधि प्राप्त की। 

कल्पना को 1998 में नासा में शामिल कर लिया गया कि यहां रहकर उन्होंने बहुत सारे रिसर्च किये, उनके लगन और मेहनत को देखते हुए बाद में उन्हें अंतरिक्ष मिशन की टॉप 15 की टीम में शामिल कर लिया गया और देखते ही देखते उन 6 लोगों की टीम में भी उनका नाम आ गया जिन्हें अंतरिक्ष में भेजा जाना था और इसी तरह कल्पना के सपनों को अब पंख लग चुके थे। 


उनका पहला अंतरिक्ष मिशन 19 नवंबर 1997 को 6 अंतरिक्ष यात्रियों के साथ अंतरिक्ष शटल कोलंबिया की उड़ान STS 87 से शुरू हुआ. कल्पना चावला अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम भारतीय महिला थी यह मिशन सफलतापूर्वक 5 दिसंबर 1997 को समाप्त हुआ उसके बाद भारत के टैलेंट को पूरे विश्व में जाना जाने लगा जिस समय भारत के लोगों को अंतरिक्ष की समझ भी नहीं थी उस समय भारत की बेटी कल्पना चावला ने अंतरिक्ष में जाकर पूरे विश्व में भारत का परचम लहराया था सभी ने उनके जज़्बे को सलाम किया और 5 साल के बाद फिर से नासा ने उन्हें अंतरिक्ष में जाने के लिए चुना कल्पना चावला की दूसरी उड़ान 16 जनवरी 2003 को कोलंबिया स्पेस शटल से ही आरंभ हुई थी यह 16 दिन का मिशन था इस मिशन पर उन्होंने अपने सहयोगी के साथ मिलकर लगभग 80 परीक्षण और प्रयोग किए लेकिन फिर वह हुआ जिसे सोचकर आँखें भर आती हैं, हाथों में फूल लिए हुए स्वागत के लिए खड़े वैज्ञानिक और अंतरिक्ष प्रेमी सहित पूरा विश्व उस नज़ारे को देखकर शोक में डूब गया। धरती पर उतरने में सिर्फ 16 मिनट बाकी रह गये थे की तभी अचानक शटल ब्लास्ट हो गया और कल्पना के साथ-साथ सभी अंतरिक्ष यात्री मारे गये। 



भले ही कल्पना उस दुर्घटना की शिकार हुई हो लेकिन वो आज भी हमारे दिलों में जिंदा है वो आज पूरे विश्व के लोगों के लिए आदर्श है मै फिर से वही बात कहूँगा दुनिया में कुछ लोग सिर्फ जीने के लिए आते हैं मौत तो महज उनके शरीर को खत्म करती है। 

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28 Feb 2018

राजा और मकाओ तोते - Moral Stories in hindi

राजा और मकाओ तोते - Moral Stories in hindi

एक राजा था जो भ्रमण के लिए पड़ोसी राज्य गया था पड़ोस के राजा ने उन्हें 2 मकाओ तोते उपहार में दिए, मकाओ तोते बहुत सुन्दर थे राजा ने ऐसे सुन्दर पक्षियों को पहले कभी नही देखा था इसलिए, अपने राज्य में लौटने पर, उन्होंने एक पक्षी ट्रेनर को फोन किया और उसे तोतों को प्रशिक्षित करने के लिए कहा।
Moral Stories in hindi
राजा ने तोते के लिए महल के बगीचे में एक जगह की व्यवस्था की। वह अक्सर अपने महल की खिड़की से उन्हें देखकर समय बिताया करता था। एक दिन पक्षी ट्रेनर राजा के पास आया और राजा को सूचित किया की एक तोता तो आसानी से आसमान में ऊँचा उड़ रहा है लेकिन दूसरा तोता पहले दिन से ही अपनी शाखा से आगे नहीं बढ़ रहा। 



यह सुनकर राजा ने पास के राज्यों से ट्रेनर और चिकित्सकों को बुलाया, उन सभी ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया लेकिन तोते को उड़ा न सके। राजा ने अपने दरबारियों से भी तोते को उड़ाने के लिए कोई रास्ता खोजने को कहा सबने कोशिश की लेकिन वे सभी असफल रहे। तोता अपनी शाखा से बिल्कुल आगे नहीं बढ़ रहा था। आखिरकार, सब कुछ करने के बाद, राजा ने सोचा कि शायद उन्हें उस व्यक्ति की जरूरत है जो तोते या पक्षीयों की आदत से परिचित हो उन्होंने अपने दरबारियों से कहा कि वह ग्रामीण इलाकों से किसी ऐसे किसान को  लेकर आये जो उसे तोते के साथ रहे और उसकी समस्या को समझ सके।


अगली सुबह, राजा ने तोते को महल के बगीचों के ऊपर ऊंचा उड़ता देखा जिससे वो बहुत खुस और अचंभित हुआ, उसने अपने दास से कहा कि उस किसान को उससे मिलने के लिए कहें। नौकर जल्दी से चला गया और किसान को बुला लाया। 



किसान राजा के सामने आकर खड़ा हो गया, राजा ने उससे पूछा "तुमने ये कैसे किया? तोता कैसे उड़ने लगा?" अपने दोनों हाथ जोड़कर सम्मान के साथ किसान से उत्तर दिया "यह बहुत आसान था, मैंने बस उस शाखा को काट दिया जहां वो तोता बैठा था। "

Moral (शिक्षा) - हम सभी के पास कुछ खास है जो छुपा हुआ है और हम उसे तब तक नही जान पाते जब तक हम comfort zone यानी अपने आरामदायक जीवन से बहार नही आते। अगर आप भी अपने अन्दर छुपे उस Passion को जानना चाहते है जिन्दगी में कुछ हटकर कुछ बड़ा करना चाहते है तो अपने comfort zone से बाहर आइये और अपने Passion की खोज में लग जाइये।


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